देश में लोकतंत्र के मंदिर संसद भवन के अंदर कथित तौर पर ई—सिगरेट पीने के मामले में टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद बुरे फंसे हैं। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद और भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा स्पीकर से इसकी शिकायत के बाद अब लोकसभा के भीतर फुटेज की फोरेंसिक जांच की जा रही है। खबर है कि फोरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार शीतकालीन सत्र के दौरान बीते 11 दिसंबर की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
अनुराग ठाकुर ने स्पीकर से की शिकायत
जानकारी के अनुसार फोरेंसिक जांच की रिपोर्ट आने में अभी कुछ दिन लगेंगे। इस मामले में बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर एक अलग फुटेज जारी किया था जिसमें कीर्ति आजाद अपने दोनों हाथों को मुंह के पास लेकर जाते हैं। मालवीय का दावा है कि वे वेपिंग कर रहे थे। हालांकि वीडियो में ई-सिगरेट स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही। इसीलिए फुटेज की फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि यह स्थापित हो सके कि वे वाकई सदन के भीतर ई-सिगरेट पी रहे थे या नहीं। सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर अमित मालवीय ने लिखा—’भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा संसद के अंदर ई-सिगरेट पीने का आरोप टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद पर लगाए गए हैं। उनके जैसे लोगों के लिए नियम और कानून का कोई महत्व नहीं है। सोचिए, सदन में हाथ में ई-सिगरेट छिपाकर रखना कितनी गुस्ताखी है! धूम्रपान भले ही गैरकानूनी न हो, लेकिन संसद में इसका इस्तेमाल करना सरासर अस्वीकार्य है’।
भारत में पूरी तरह बैन है ई-सिगरेट
विदित हो कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम 2019 के तहत ई‑सिगरेट का उत्पादन, बिक्री, भंडारण और विज्ञापन पूरी तरह प्रतिबंधित है। अगर इस नियम का पहली बार उल्लंघन पाया जाता है तो इसके लिए एक वर्ष की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। जबकि इसके दोहराव पर सजा और जुर्माना बढ़ सकता है। यह संसदीय आचरण के भी प्रतिकूल है। अब कीर्ति आजाद के मामले की बात करें तो सूत्रों के अनुसार अगर यह स्थापित होता है तो यह बेहद गंभीर मामला होगा। लोकसभा अध्यक्ष इस मामले को या तो आचार समिति को भेज सकते हैं या फिर स्वयं ही इस पर निर्णय कर सकते हैं। आरोप साबित होने पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है जिसमें निलंबन से लेकर सदस्यता जाना तक शामिल है। इधर कीर्ति आजाद के ई-सिगरेट मामले पर तृणमूल कांग्रेस ने उनसे दूरी बना ली है। वहीं कीर्ति आजाद कह चुके हैं कि वह सांसदों के नाम बता सकते हैं, जो परिसर में ध्रूमपान करते हैं लेकिन वे इस स्तर तक गिरना नहीं चाहते।