पटना : बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों पर होने वाले आगामी चुनाव ने राज्य की सियासत में उबाल ला दिया है। एक तरफ जहां एनडीए और महागठबंधन अपने-अपने संख्याबल को दुरुस्त करने में जुटे हैं, वहीं एनडीए के प्रमुख सहयोगी और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक जीतन राम मांझी ने अपनी दावेदारी पेश कर भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने स्पष्ट लहजे में कहा है कि वे नाराज नहीं हैं, लेकिन उन्हें उनका हक याद है।
मांझी ने भाजपा नेतृत्व को उस पुराने वादे की याद दिलाई जिसमें उन्हें दो लोकसभा और एक राज्यसभा सीट देने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि हमें कहा गया था कि दो लोकसभा और एक राज्यसभा सीट मिलेगी। इसे पत्थर की लकीर बताया गया था। लोकसभा में तो हमें एक ही सीट (गया) मिली, जिसके लिए हम पीएम मोदी के शुक्रगुजार हैं। लेकिन राज्यसभा का जो वादा था, उस पर उन्हें अपने वचन के आधार पर सोचना चाहिए।
मालूम हो कि बिहार विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, एक सीट जीतने के लिए 41 वोटों की आवश्यकता है। वर्तमान में 202 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। 5 सीटें जीतने के लिए 205 वोटों की जरूरत है, जबकि 4 सीटें सुरक्षित दिख रही हैं। विपक्षी खेमे के पास करीब 35-40 विधायकों का आधार है। यदि वे AIMIM (5) और बसपा (1) को साध लेते हैं, तो वे एक से ज्यादा सीट पर दावेदारी ठोक सकते हैं। चर्चा है कि एनडीए 2 (भाजपा) +2 (जेडीयू) +1 (सहयोगी) के फॉर्मूले पर काम कर रहा है। मांझी की नजर इसी ‘सहयोगी’ वाली सीट पर टिकी है।
राज्यसभा से जिन पांच सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बड़े नाम शामिल हैं:
1. रामनाथ ठाकुर (JDU)
2. हरिवंश नारायण सिंह (JDU)
3. उपेंद्र कुशवाहा (हाल ही में एनडीए में शामिल)
4. प्रेमचंद्र गुप्ता (RJD)
5. अमरेंद्रधारी सिंह (RJD)
जीतन राम मांझी का यह बयान ऐसे समय आया है जब तेजस्वी यादव की आरजेडी भी सेंधमारी की कोशिशों में जुटी है। हालांकि मांझी ने कहा है कि देना न देना आपकी मर्जी, लेकिन राजनीति में ऐसे बयानों के गहरे मायने होते हैं। यदि मांझी की मांग को अनसुना किया गया, तो राज्यसभा चुनाव की वोटिंग के दौरान एनडीए के भीतर एकजुटता की परीक्षा हो सकती है।