JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान संभालते ही नीतीश कुमार ने बांका से पार्टी सांसद गिरधारी यादव पर तगड़ा ऐक्शन ले लिया है। पार्टी ने लोकसभा स्पीकर से गिरधारी यादव की सांसदी खत्म करने के लिए लिखा है। गिरधारी के पुत्र चाणक्य ने हाल के विधानसभा चुनाव में राजद के टिकट पर जदयू कैंडिडेट के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इसके अलावा बांका से जदयू सांसद गिरधारी यादव ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर केंद्र सरकार की SIR नीति का विरोध किया और चुनाव आयोग की आलोचना की थी। लोकसभा में जेडीयू संसदीय दल के नेता दिलेश्वर कामत ने पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए स्पीकर को सांसद गिरधारी यादव की सदस्यता रद करने संबंधि नोटिस दिया है।।
बताया जाता है कि JDU में गिरधारी यादव को लेकर विवाद का मुख्य कारण विधानसभा चुनाव में सांसद द्वारा अपने बेटे के लिए जदयू के आधिकारिक कैंडिडेट मनोज यादव के खिलाफ बतौर आरजेडी प्रत्याशी पक्ष में प्रचार करना है। हालांकि गिरिधारी यादव के बेटे चाणक्या प्रकाश रंजन बांका जिले की बेलहर विधानसभा सीट से राजद के टिकट पर चुनाव हार गए थे। आरजेडी ने उन्हें यहां से टिकट दिया था, जबकि इस सीट से एनडीए की ओर से जदयू के मनोज विधायक उम्मीदवार थे। इस चुनाव में मनोज यादव ने 1,15,393 वोट हासिल कर शानदार जीत दर्ज की थी। अब इसी मामले को लेकर JDU ने लोकसभा स्पीकर से अपने सांसद गिरिधारी यादव की लोकसभा सदस्यता समाप्त करने की आधिकारिक मांग की है। पार्टी ने उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया है। जेडीयू संसदीय दल के नेता दिलेश्वर कामत ने इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर उन्हें औपचारिक नोटिस सौंपा है।
सूत्रों के अनुसार विधानसभा चुनाव के दौरान गिरधारी यादव के बेटे ने आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। जेडीयू का आरोप है कि सांसद ने अपनी पार्टी के खिलाफ जाकर अपने बेटे के लिए चुनाव प्रचार किया। पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता माना और नीतीश कुमार के पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते ही कठोर कार्रवाई का फैसला किया। इसी के तहत गिरधारी यादव की संसद सदस्यता रद्द करने की मांग की गई है। गिरिधारी यादव सीएम नीतीश कुमार के करीबी माने जाते रहे हैं। लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद से पार्टी उनसे खफा है। गिरिधारी बांका लोकसभा सीट से सांसद हैं। इससे पहले वे बेलहर विधासभा सीट से जदयू विधायक भी रह चुके हैं। इसके अलावा विस चुनाव के दौरान जेडीयू सांसद गिरधारी यादव ने पार्टी लाइन से इतर चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने SIR को ‘तुगलकी फरमान’ बताते हुए कहा था कि यह आम लोगों के लिए परेशानी भरा है। बिहार विधानसभा चुनाव से ऐन पहले सांसद के इस बयान से जेडीयू का शीर्ष नेतृत्व नाराज था. इसके लिए गिरिधारी यादव को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था।