इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) की बिहार ईकाई ने केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लाए गए चार नए श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को श्रमिक विरोधी, अमानवीय और असंवैधानिक बताते हुए इसके विरोध में बुलाए गए देशव्यापी बंद को पूरी तरह सफल बताया। केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाए गए राष्ट्रव्यापी हड़ताल को पूरी तरह सफल करार देते हुए इंटक के बिहार प्रदेश अध्यक्ष चंद्र प्रकाश सिंह ने प्रस्तावित श्रम कानूनों को तत्काल वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि ये श्रम संहिताएं मजदूरों के लंबे संघर्ष से हासिल अधिकारों को कमजोर करती हैं। ये उनकी सामूहिक सौदेबाजी की ताकत को समाप्त करती हैं और तथाकथित सुधारों के नाम पर कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह श्रमिक वर्ग के अधिकारों पर सीधा हमला है।
देशव्यापी हड़ताल को सफल करार दिया
उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इंटक ने देश के सभी प्रगतिशील राज्य सरकारों से अपील की कि वे अपनी-अपनी विधानसभाओं में प्रस्ताव पारित कर इन चारों श्रम संहिताओं के नियम निर्माण को अस्वीकार करें। चंद्र प्रकाश सिंह ने कहा कि राज्यों का दायित्व है कि वे श्रमिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करें और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के श्रम मानकों का पालन सुनिश्चित करें। हड़ताल के दौरान पटना में आईटी गोलंबर से डाकबंगला चौराहा तक निकाली गई विशाल रैली में हजारों श्रमिकों ने भाग लिया। रैली के बाद आयोजित सभा में श्रमिकों ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए श्रम संहिताओं के विरोध में आवाज बुलंद की।
सभा को प्रदेश अध्यक्ष श्री चन्द्र प्रकाश सिंह के साथ-साथ इंटक के नेता श्री एस. एन. मंडल, श्री अखिलेश पांडेय, श्री ओ. पी. सिंह, श्री मुकेश ठाकुर, श्री बिनोद राय, श्री धर्मेन्द्र कुमार, श्री सुरेन्द्र यादव, श्री पवन कुमार और श्री प्रभात कुमार ने संबोधित किया। इंटक ने स्पष्ट किया कि यह हड़ताल केंद्र सरकार के लिए स्पष्ट संदेश है कि देश का श्रमिक वर्ग अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगा और किसी भी प्रकार के कॉरपोरेट दबाव के आगे झुकेगा नहीं।