पटना/नालंदा : पटना उच्च न्यायालय ने एक सामाजिक कार्यकर्ता को बिना पर्याप्त आधार के असामाजिक तत्व घोषित किए जाने के मामले में नालंदा के तत्कालीन जिलाधिकारी (डीएम) के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायालय ने इस मामले में ₹1 लाख 10 हजार का जुर्माना भी लगाया है तथा निर्देश दिया है कि यह राशि छह माह के भीतर मामले के लिए जिम्मेदार संबंधित पुलिसकर्मियों और जिला प्रशासन के अधिकारियों से वसूल की जाए।
न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद एवं न्यायमूर्ति कुमार मनीष की खंडपीठ ने यह आदेश गिरियक निवासी राजेश कुमार द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। याचिकाकर्ता ने 23 मार्च को तत्कालीन डीएम द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें असामाजिक तत्व घोषित किया गया था। अदालत को बताया गया कि राजेश कुमार एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और उनके विरुद्ध कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। इसके बावजूद उन्हें असामाजिक तत्व घोषित कर दिया गया तथा गिरियक थाना क्षेत्र का निवासी होने के बावजूद सिलाव थाना में नियमित हाजिरी लगाने का निर्देश दिया गया।
सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने पाया कि प्रशासन द्वारा पारित आदेश तथ्यों और विधिक आधारों पर खरा नहीं उतरता तथा इससे याचिकाकर्ता के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन हुआ है। इन तथ्यों के आधार पर पटना उच्च न्यायालय ने तत्कालीन डीएम का आदेश निरस्त करते हुए ₹1.10 लाख का जुर्माना लगाया और निर्देश दिया कि उक्त राशि छह माह के भीतर मामले के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं पुलिसकर्मियों से वसूल की जाए।
सत्यनारायण चतुर्वेदी की रिपोर्ट