पटना/नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सेवानिवृत्त हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों एवं न्यायाधीशों को रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली सुविधाओं में देशभर में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि न्यायाधीशों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाएं इस आधार पर अलग-अलग नहीं हो सकतीं कि उन्होंने किस राज्य के हाईकोर्ट में सेवा दी है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीशों को सुरक्षा एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पूरे देश में समान मानक लागू किए जाने चाहिए। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने राज्यों में उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं में असमानता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ₹45,000 से ₹50,000 की राशि में चालक और सुरक्षा कर्मी जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराना व्यावहारिक नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दो सप्ताह के भीतर एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्देश दिया है। यह समिति देशभर के लिए सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीशों को मिलने वाली सुविधाओं के संबंध में समान मानक एवं दिशा-निर्देश तैयार करेगी। समिति को अपने गठन की तिथि से तीन माह के भीतर अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करनी होंगी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि घरेलू सहायक, चालक, दूरभाष सुविधा, चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति, सरकारी आवास तथा सुरक्षा जैसी सुविधाओं में राज्यों के बीच भिन्नता का कोई औचित्य नहीं है। न्यायालय ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की गरिमापूर्ण स्थिति बनाए रखने के लिए पूरे देश में समान सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
सत्यनारायण चतुर्वेदी की रिपोर्ट