बिहार सरकार फिर से चारा घोटाले की फाइल खोलेगी। इस घोटाले के पांच मामलों में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव सजायाफ्ता हैं। नीतीश सरकार के वित्त मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि इस घोटाले के 950 करोड़ रुपये वसूलने के लिए सरकार कोर्ट जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार CBI और इनकम टैक्स विभाग से भी बात करेगी। 1990 के दशक में हुए इस घोटाले में कई लोगों ने सरकारी पैसे का गलत इस्तेमाल किया था। अब सरकार उनसे पैसे वापस लेने की तैयारी कर रही है। चुनाव से पहले सरकार का यह कदम बड़ा माना जा रहा है। दरअसल, पटना हाई कोर्ट ने CBI को चारा घोटाले की जांच सौंपी थी। कोर्ट ने घोटाले में शामिल लोगों से पैसे वसूलने की जिम्मेदारी भी CBI को दी थी। कोर्ट ने कहा था कि दोषियों की संपत्ति जब्त करके पैसे वसूले जाएं। लेकिन, लगभग 25 साल बीत जाने के बाद भी घोटाले का एक भी रुपया सरकारी खजाने में नहीं आया है।
चारा घोटाला मामले में पटना हाई कोर्ट ने सीबीआई को जांच सौंपने के दौरान उस घोटाले की रकम वसूली की जिम्मेदारी भी सौंपी थी। यह वसूली दोषियों की संपत्ति जब्त कर वसूला जाना था। लेकिन करीब ढाई दशक बीत जाने के बाद भी घोटाले का एक भी रुपये सरकारी खजाने में नहीं पहुंचा है। इस मामले में जून 1997 में मुकदमा दर्ज किया गया, जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव आरोपी बनाए गए थे। इस घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा का भी नाम शामिल था। इस घोटाले के तहत दर्ज कई केसों में लालू यादव को सजा हो चुकी है। लेकिन घोटाले के पैसे की वसूली अब भी लंबित है।
सूत्रों के अनुसार चूंकि यह मामला अभी कोर्ट में है, इसलिए बिहार सरकार पूरी तैयारी के साथ कदम उठाना चाह रही है।अगर नीतीश सरकार चारा घोटाले की रकम वापस लाने की कार्रवाई शुरू करती है तो इस चुनावी वर्ष में यह एक बड़ी पहल होगी। इस मामले में राजनीतिक लाभ भी मिलने की संभावना सरकार के संज्ञान में है। चारा घोटाला का मामला बिहार और झारखंड दोनों राज्यों से जुड़ा रहा है। ऐसे में दोषियों से वसूली करना एक लंबी प्रक्रिया हो सकती है। इसबीच महागठबंधन में राजद की सहयोगी कांग्रेस ने सरकार के इस नए मूव को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया है, जबकि जदयू ने कहा कि वे राज्य सरकार के इस कदम का स्वागत करेंगे।