डॉ. रवींद्र सिन्हा
(लेखक 1955 में पीएमसीएच से उत्तीर्ण हैं। वे न्यूयॉर्क के एनवाईयू लगॉन मेडिकल सेंटर में शिशु चिकित्सा के सहायक निदेशक तथा एंबुलेटरी पीडियाट्रिक्स के प्रमुख रहे हैं)।
सौ साल का स्वर्णिम इतिहास अपने अंदर समेटे पटना चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (पीएमसीएच) ने एक शताब्दी के कालखंड में चिकित्सा जगत को कई अनमोल रत्न प्रदान किए हैं। इनमें से कई तो ऐसे हैं जिन्होंने संयुक्त बिहार में पहली बार चिकित्सा के उस विधा विशेष के पथकृप्रदर्शक बने। शिशु रोग के क्षेत्र में ऐसे ही अग्रणी प्रकाशपुंज हुए डॉ. गया प्रसाद। 1932 में चिकित्सा स्नातक (एमबीबीएस) व 1938 में एमडी की डिग्री लेने के बाद अपनी प्रतिभा के बल पर वे सात समंदर पार जाकर पश्चिम के चिकित्सा जगत को अपना लोहा बनवाया और एक के बाद एक तीन स्वर्ण पदक अपने नाम किए, जिनमें सर्वाधिक अंक प्राप्त करने के लिए व्हीलर गोल्ड मेडल, स्त्रीरोग के क्षेत्र में खूब्जहरी गोल्ड मेडल तथा शल्य चिकित्सा में स्टीफंसन गोल्ड मेडल शामिल हैं।
विदेश में अपनी चिकित्सीय मेधा का ध्वज पताका लहराने के बाद वे स्वदेश लौटे और अगले 27 वर्षों तक बच्चों की चिकित्सा तथा चिकित्सा शिक्षा में अध्यापन का कार्य किया। इस दौरान 5 वर्षों तक वे पीएमसीएच के प्राचार्य भी रहे। उनके दर्जनों उल्लेखनीय योगदानों में से सर्वाधिक महत्वपूर्ण है पीएमसीएच में शिशु रोग का ओपीडी शुरू करना। यह गया बाबू ही थे, जिन्होंने 1948 में पीएमसीएच में पहली बार शिशु चिकित्सा में एमडी की परीक्षाएं कराईं और उनके प्रयासों से ही 1949 और 1952 में पहली बार शिशु रोग विशेषज्ञ एमडी की डिग्री लेकर पीएमसीएच से निकले। ऐसे में उन्हें बिहार में शिशु चिकित्सा का पितामह कहा जाना अतिशयोक्ति नहीं होगी।
गया बाबू ने अपने इंग्लैंड प्रवास के दौरान 1940 में लंदन से एमआरसीपी, अगले साल लिवरपूल से ट्रॉपिकल मेडिसिन में डिप्लोमा और इसी साल शिशु स्वास्थ्य पर भी विशेष पाठ्यक्रम पूरा किया था। इन विशिष्ट अध्ययनों का लाभ कई वर्षों बाद बिहार को मिला, जब उन्होंने अपने विशेष प्रशिक्षण के दम पर पटना ब्लड बैंक, मेडिकल साइंस काउंसिल तथा अन्य संस्थाओं की स्थापना में अग्रणी भूमिका निभाई। विशेष बात रही कि वे चिकित्सीय प्रशिक्षण के दौरान हिंदी भाषा के प्रयोग पर बल देते थे ताकि ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले प्रशिक्षु चिकित्सीय प्रशिक्षण आसानी से सीख सकें।
विश्वविद्यालय के निरीक्षक के रूप में चिकित्सा शिक्षा को मानक रूप देने में उन्होंने सराहनीय भूमिका निभाई। वे इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, इंडियन एसोसिएशन ऑफ पैथोलॉजी और इंडियन पीडियाट्रिक्स सोसाइटी के सदस्य भी रहे। शिशु चिकित्सा के क्षेत्र में उनके महान कार्यों से नई पीढ़ी को अवगत कराने के लिए पीएमसीएच द्वारा प्रतिवर्ष डॉ. गया प्रसाद स्मृति व्याख्यान का आयोजन कराया जाता है।