ओडिशा के कटक में वहां के सरकारी SCB मेडिकल कॉलेज में आज सोमवार को तड़के हुए एक भीषण अग्निकांड में अस्पताल के ICU में भर्ती करीब 10 मरीजों की मौत होने की खबर है। इस हादसे में गंभीर रूप से घायल मरीजों को बचाते समय 11 अस्पताल कर्मी भी बुरी तरह झुलस गए। अगलगी की यह घटना अस्पताल के ट्रॉमा केयर विभाग की ICU में रात 2:30 से 3:00 बजे के बीच हुई। उस वक्त इस वार्ड में गंभीर रोगियों का इलाज किया जा रहा था। हालांकि, अब तक मृतकों की संख्या स्पष्ट नहीं है। वहीं, आग की वजह का भी पता नहीं चला है। बताया गया कि आग लगते ही फायर सर्विस की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं। आग इतनी भयंकर थी कि काफी मशक्कत के बाद उस पर काबू पाया गया। किसी तरह अस्पताल स्टाफ, पुलिस और मरीजों के परिजनों की मदद से ICU में भर्ती मरीजों को सुरक्षित अन्य वार्डों में शिफ्ट किया गया। बताया जाता है कि वहां कई मरीजों की स्थिति गंभीर होने के कारण हालात काफी खराब बने हुए हैं।
PM ने जताया शोक, CM पहुंचे, शॉर्ट-सर्किट की आशंका
इधर इस हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख जताते हुए कहा कि अत्यंत पीड़ादायक वाकया है। उन्होंने उन सभी परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया। प्रधानमंत्री ने घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना भी की। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि PMNRF से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी तथा घायलों को 50,000 रुपये की तुरंत मदद प्रदान की जाएगी। हादसे की सूचना मिलते ही ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग अस्पताल पहुंचे और हालात का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने बताया कि शुरुआती जांच में शॉर्ट-सर्किट को आग की वजह माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि कुल 23 मरीजों को अन्य विभागों में शिफ्ट किया गया है। इनमें से 7 मरीजों की मौत ट्रांसफर के दौरान ही हुई, जबकि 3 की मौत बाद में हो गई।
मृतकों के परिजनों को 25 लाख सहायता राशि का ऐलान
प्रधानमंत्री मोदी और ओडिशा के मुख्यमंत्री माझी ने अधिकारियों को घायलों के समुचित इलाज का निर्देश देते हुए मृतकों के परिजनों के लिए अलग—अलग 2 लाख और 25 लाख रुपये के मुआवज़े की घोषणा की है। घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने इस हादसे की न्यायिक जांच के आदेश भी दे दिए हैं, ताकि आग लगने की वास्तविक वजह और जिम्मेदारियों का पता चल सके। बताया जाता है कि अभी भी 5 मरीजों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। इस हादसे में अधिकतर मौतें वेंटिलेटर सपोर्ट वाले मरीजों की हुई क्योंकि आग की वजह से उनका वेंटिलेटर सपोर्ट डिस्टर्ब हुआ जिससे उनका दम घुट गया।