छपरा में रेलवे ट्रैक पर एक एएनएम का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। मृतका का नाम अंकिता बताया जाता है और वह एक निजी नर्सिंग होम में बतौर नर्स काम करती थी। शव की हालत देखकर परिजनों ने गैंगरेप कर हत्या की आशंका जताई है। मृतका के पिता ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी के साथ गैंगरेप कर गला रेतकर हत्या की गई और मामले को हादसा दिखाने के लिए शव को रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया गया। अंकिता से उसके पिता की आखिरी बातचीत 4 दिन पहले शाम को हुई थी और उसी के बाद से उसका कोई पता नहीं चल रहा था। अंकिता के पिता ने यह भी आरोप लगाया कि नर्सिंग होम संचालक और दो कर्मचारियों की मिलीभगत से पहले दुष्कर्म किया गया और फिर बेरहमी से उसकी हत्या कर दी गई।
अंकिता के पिता ने बताया कि उनकी बेटी पिछले करीब एक साल से छपरा सदर अस्पताल के डॉक्टर पंकज कुमार के निजी नर्सिंग होम में काम कर रही थी। वह अस्पताल के पास ही किराए के कमरे में रहती थी। क्रिसमस वाले दिन की शाम करीब 5 बजे आखिरी बार बेटी से बात हुई थी। उसने बताया था कि रात 9 बजे तक ड्यूटी है और अगली सुबह भी काम पर जाना है। लेकिन जब अगले दिन सुबह उसे फोन किया गया तो उसका मोबाइल बंद मिला। कुछ देर बाद नर्सिंग होम संचालक डॉक्टर पंकज कुमार का फोन आया और उन्होंने बताया कि वह न तो अस्पताल पहुंची है और न ही घर गई है। इसे लेकर छपरा जीआरपी थाना अध्यक्ष ने बताया कि पहले अज्ञात शव मिलने पर यूडी केस दर्ज किया गया था। पहचान होने के बाद परिजनों का आवेदन मिला है। इसमें आरोप गंभीर हैं और घटना के लेकर हर पहलू पर जांच की जा रही है।
इसके बाद परिवार के लोगों ने उसे ढूंढना शुरू किया। इसी दौरान उन्हें सूचना मिली कि रेलवे ट्रैक पर उसका शव मिला है। शव की हालत बेहद खराब थी, जीभ बाहर थी और चेहरे व शरीर पर गहरे जख्म के निशान थे। यह खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। मृतका के भाई ने बताया कि एफआईआर दर्ज कराने के लिए उन्हें रेलवे पुलिस और स्थानीय थाने के बीच चक्कर काटना पड़ा। एक थाने से दूसरे थाने भेजा जाता रहा और देर रात तक मामला दर्ज नहीं हुआ। अगले दिन पहले अंतिम संस्कार किया गया, फिर रेलवे थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। परिजनों ने बताया कि उन्हें पता चला है कि आखिरी रात को पेशेंट को अटेंड करने को लेकर अंकिता का विवाद अखिलेश यादव और फिरोज आलम से हुआ था। उन्होंने पुलिस को लिखित बयान दिया है कि बेटी की हत्या कर शव ट्रैक पर रखा गया है, क्योंकि शव की स्थिति हादसे जैसी नहीं लगती।