पटना: भारत एक सांस्कृतिक रूप से संपन्न देश है और चैता जैसे लोकगीत हमारे लोकजीवन और समृद्ध संस्कृति की झलक देते हैं। उक्त बातें बिहार सरकार के मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने कहीं। वे गुरुवार को चिति युवा आयाम द्वारा रामनवमी की पूर्व संध्या पर बिहार सांस्कृतिक विद्यापीठ परिसर में आयोजित चैता गायन समारोह के उद्घाटन के बाद संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि यह सुखद संयोग है कि चैत्र मास में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जन्म हुआ था और इसीलिए चैता के गायन में प्रभुराम की विशेष स्तुति होती है। इसी समय में चैत्र नवरात्र और चैती छठ भी हो रहा होता है। इस प्रकार संपूर्ण चैत्र मास का माहौल भक्तिमय रहता है। मंत्री ने चैता गायन के इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि पटना जैसे महानगर में पारंपरिक लोकगीत के आयोजन से युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ेगी।
उद्घाटन के बाद गायन मंडली ने चैता शैली में राम भक्ति से लेकर सामाजिक और वसंत मौसम के सौंदर्य का बखान करने वाले गीतों से माहौल को रससिक्त कर दिया। बाल गायक मानविक तिवारी के “दशरथ घरे आइले ललनवा…”, “सुतल पिया के जगावे, कोइल तोरी मीठी बोलिया…” जैसे गीतों पर लोग खूब झूमे। गायन मंडली में पाटलिपुत्र उपभाग के सह कार्यवाह सतीश और उनकी टोली थी।
इस अवसर पर प्रज्ञा प्रवाह की प्रांतीय इकाई चिति के अध्यक्ष प्रो. लक्ष्मी नारायण, संयोजक कृष्णकांत ओझा, युवा आयाम प्रमुख डॉ. सोनू कुमार, समाजसेवी अभिजीत कश्यप, प्रो. जय देव, बिहार सांस्कृतिक विद्यापीठ के सत्यपाल श्रेष्ठ, प्रशांत रंजन समेत राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।