बिहार की बदलती सियासी परिस्थितियों और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच, ‘अगला मुख्यमंत्री कौन?’ यह सवाल राज्य की राजनीति के केंद्र में आ गया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मंत्री श्रवण कुमार के बयान ने कयासों को एक नई दिशा दी है। सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की हालिया जेडीयू एंट्री ने समर्थकों में भारी उत्साह भर दिया है। कई विधायक उन्हें सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर देखना चाहते हैं। बिहार के वर्तमान डिप्टी सीएम और बीजेपी के कद्दावर चेहरे, जिनका नाम भी सियासी गलियारों में मजबूती से गूंज रहा है।
जेडीयू के वरिष्ठ नेता और मंत्री श्रवण कुमार ने इन अटकलों पर विराम लगाते हुए गठबंधन की मर्यादा को स्पष्ट करते हुए कहा कि अगला सीएम कौन होगा, यह न तो कोई अकेला विधायक तय करेगा और न ही कोई समर्थक। इसका अंतिम निर्णय NDA का शीर्ष नेतृत्व (दिल्ली और राज्य के बड़े नेता) सामूहिक रूप से करेगा। श्रवण कुमार ने माना कि निशांत कुमार को सीएम बनाने की मांग उनके समर्थकों की ओर से “स्वाभाविक” है, लेकिन यह केवल उनकी व्यक्तिगत भावनाएं हैं।
फिलहाल मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। बिहार की 5 राज्यसभा सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए NDA पूरी तरह सक्रिय है। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के आवास पर हाल ही में बैठक हुई है, जहाँ विधायकों को वोटिंग के निर्देश दिए गए। शनिवार को उपेंद्र कुशवाहा और 15 मार्च को संसदीय कार्यमंत्री के आवास पर रणनीतिक चर्चा होनी है। श्रवण कुमार का दावा है कि सभी 5 सीटें NDA के खाते में आएंगी।
LPG संकट और कालाबाजारी
राजनीति के अलावा मंत्री ने जनता से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी राय रखी कि उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में गैस की कोई किल्लत नहीं है। अफवाह फैलाने वालों और कालाबाजारी करने वालों को चेतावनी दी गई है कि उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बिहार की राजनीति इस समय ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है। जहाँ एक ओर परिवारवाद और विरासत की राजनीति (निशांत कुमार) की चर्चा है, वहीं दूसरी ओर बीजेपी का सांगठनिक आधार। गेंद अब पूरी तरह से NDA के शीर्ष नेतृत्व के पाले में है।