पटना/किशनगंज : शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता के मामले में किशनगंज के तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) राजेश कुमार सिन्हा पर कड़ी कार्रवाई की गई है। विभागीय जांच में 40 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होने के बाद सरकार ने उनकी पेंशन में आजीवन 25 प्रतिशत की कटौती का आदेश जारी किया है। इस संबंध में शिक्षा विभाग ने औपचारिक संकल्प जारी कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, किशनगंज के जिलाधिकारी ने 21 जून 2024 को शिक्षा विभाग को भेजी अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन डीपीओ पर गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों का आरोप लगाया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि बेंच-डेस्क योजना, विद्यालय जीर्णोद्धार योजना, प्री-फैब स्ट्रक्चर निर्माण, नाइट गार्ड की बहाली, हाउसकीपिंग योजना सहित अन्य मदों में नियमों की अनदेखी कर करोड़ों रुपये का फर्जी भुगतान किया गया।
विशेष रूप से बेंच-डेस्क आपूर्ति के बिना ही भुगतान किए जाने का मामला जांच में प्रमाणित हुआ। जांच में यह भी पाया गया कि विभिन्न योजनाओं में प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया और अपने चहेते लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर 1 जुलाई 2024 से राजेश कुमार सिन्हा को निलंबित कर विभागीय कार्यवाही शुरू की गई थी। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा की गई विस्तृत समीक्षा में अधिकांश आरोप प्रमाणित या आंशिक रूप से प्रमाणित पाए गए।
इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला मानते हुए सरकार ने सेवानिवृत्ति के बाद भी दंडात्मक कार्रवाई करते हुए उनकी पेंशन से स्थायी रूप से 25 प्रतिशत कटौती का निर्णय लिया है। शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई संभव है।