बिहार में आगामी ‘जनगणना 2027’ को लेकर तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू हो गई हैं। राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने स्पष्ट किया कि यह देश की पहली ‘पूरी तरह डिजिटल जनगणना’ होगी। इस बार कागजों का झंझट खत्म होगा और नागरिक अपने मोबाइल फोन या सरकारी पोर्टल के जरिए सीधे अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। नागरिकों को 17 अप्रैल से 1 मई 2027 तक खुद अपनी जानकारी पोर्टल या ऐप पर अपलोड करने का मौका मिलेगा।
डिजिटल प्रविष्टि के बाद 2 मई से 31 मई तक जनगणना कर्मी घर-घर जाकर डेटा का सत्यापन करेंगे। इससे डेटा संकलन तेज होगा और मानवीय त्रुटियों की गुंजाइश कम हो जाएगी। जनगणना के दौरान प्रत्येक परिवार से कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। इनमें मकान की स्थिति, उपलब्ध बुनियादी सुविधाएं (बिजली, पानी, शौचालय), घरेलू उपकरण और जीवन स्तर से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु शामिल होंगे। स्टेट कोऑर्डिनेटर सीके अनिल के अनुसार, इन्हीं आंकड़ों के आधार पर भविष्य की सरकारी योजनाएं और ‘विकसित भारत 2047’ की नीतियां तैयार की जाएंगी।
9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक चलेगा, जिसमें गणना कर्मी घर-घर जाकर अंतिम आबादी का आंकड़ा जुटाएंगे। इस अभियान की कमान राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल और जनगणना निदेशक एम. रामचंद्रुडू संभाल रहे हैं। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने जोर देकर कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि राज्य की नीतियों की नींव है। उन्होंने अधिकारियों को टीम भावना, पारदर्शिता और सटीकता के साथ काम करने का निर्देश दिया। डिजिटल जनगणना से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि प्रशासनिक डेटा प्रणाली भी आधुनिक और मजबूत बनेगी।