बिहार ने तय किया ‘पत्थर पर लकीर’ का लक्ष्य
बिहार विधानसभा में अपने बजट भाषण में डिप्टी सीएम सह राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अपने विभाग की नई पहलों और उपलब्धियों का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी कहा करते हैं—’मक्खन पर लकीर तो सब खींचते हैं, खींचनी है तो पत्थर पर लकीर खींचो’। पीएम मोदी के इसी सूत्र को ध्येय बनाकर अब बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने आमजन से जुड़े कार्यों को सरल, सुलभ, पारदर्शी और जवाबदेह तथा समयबद्ध बनाने की पहल शुरू की है। 2026-2027 के बजट भाषण में उन्होंने कहा कि भूमि से जुड़ी प्रक्रियाएँ कानून की जटिलता, प्रक्रियात्मक अपेक्षाओं और समाज के भावनात्मक जुड़ाव से प्रभावित होती हैं। इसलिए अब यह स्पष्ट कर दिया गया है कि राजस्व प्रशासन को जनकेंद्रित और विश्वसनीय बनाना सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। इसके लिए सरकार ने बिचौलियों और भूमाफियाओं के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू की है। साथ ही डिजिटल और फिजिकल तकनीक से व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है।
‘भूमिसुधार जनकल्याण संवाद’ से जमीनी समाधान
बिहार में 12 दिसंबर से प्रमंडलवार शुरू हुआ ‘भूमिसुधार जनकल्याण संवाद’ जिलावार भी आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम को सोशल मीडिया पर लाइव कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है। इसमें तीन मूल समस्याओं दाखिल-खारिज, परिमार्जन और जमीन मापी को लक्षित कर मौके पर समाधान कराया जा रहा है और समान प्रकृति की समस्याओं के लिए गाइडलाइन तय की जा रही है। मंत्री ने बताया कि राज्य में अब आनलाइन दाखिल-खारिज निष्पादन 75% से बढ़कर 84% हो गया है, जबकि लंबित मामलों का अनुपात 25% से घटकर 16% पर आ गया है, वहीं ‘परिमार्जन प्लस’ निष्पादन 10% से बढ़कर 75% पर पहुंच गया है। डिप्टी सीएम ने कहा कि विवाद-रहित दाखिल-खारिज के लिए 14 दिन की समय-सीमा निर्धारित कर कार्यों में तेजी लाई जा रही है।
ई-मापी और समयबद्ध सेवा
नई पहल के तहत अब भूमि मापी के लिए ई मापी व्यवस्था लागू की गई है। निर्विवाद मापी 7 दिन में, विवादित मापी 11 दिन में और रिपोर्ट अपलोड करने की सीमा 14 दिन तय की गई है। इन सुधारों से राज्य में चल रहे एग्रीस्टैक महाभियान को भी गति मिली। मात्र 35 दिनों में 40 लाख किसानों की फार्मर रजिस्ट्री संभव हुई। दिसंबर से जनवरी अंत तक दाखिल-खारिज और परिमार्जन के 40 लाख लंबित आवेदनों में से 11.50 लाख का निष्पादन किया गया। मंत्री ने यह भी कहा कि
सूबे में भूमि विवाद का बड़ा कारण जाली दस्तावेज रहे हैं। अब इस मामले में अनिवार्य प्राथमिकी का निर्देश दिया गया है। वहीं शहरी क्षेत्रों में वंशावली निर्गत करने की जिम्मेदारी अंचलाधिकारियों को सौंपी गई है।
पुराने अभिलेखों से आधुनिक सर्वे की ओर
बिहार में अधिकांश भूमि अभिलेख 1890–1920 के कैडेस्ट्रल सर्वे काल के हैं। 1958 में शुरू रीविजनल सर्वे 1975 में रुक गया था। अब सटीक, सहज और समयबद्ध भूमि सर्वे की दिशा में राजस्व महाभियान को गति दी गई है। 31 मार्च 2026 तक 46 लाख लंबित आवेदनों के निष्पादन का लक्ष्य है। अब तक 34 लाख से अधिक दस्तावेज स्कैन किए जा चुके हैं। पुराने दस्तावेजों को डिजिटल, पेपरलेस और AI-सक्षम राजस्व न्याय के तहत लाया जा रहा है। इसमें आवेदन से आदेश तक पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पेपरलेस बनाया गया है, जिसमें AI तकनीक का उपयोग भी शामिल है। इससे न्याय देने की गति बढ़ी है। नियमित सुनवाई, समय पर अपील और आधुनिक प्रणाली से राजस्व न्याय व्यवस्था में सुधार हुआ है। DCLR/ADM स्तर पर निष्पादन दर 51.7% से बढ़कर 55.9% हुई है। इसको लगातार बढ़ाना उद्देश्य है।
मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण नियमावली
राज्य में राजस्व कर्मचारी के 3303 नए पद सृजित किए गए हैं। पहले स्वीकृत 8472 पदों की तुलना में अब कुल पदों की संख्या बढ़कर 11,775 हो गई है। वर्तमान में लगभग 3767 कर्मी कार्यरत हैं। रिक्तियों को भरने के लिए वर्ष 2023 में 3559 पदों पर बहाली हेतु अधियाचना बिहार कर्मचारी चयन आयोग को भेजी गई। शेष रिक्त पदों के रोस्टर क्लियरेंस के बाद वर्ष 2025 में 4492 पदों के लिए प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग को प्रेषित की गई है। इससे अंचल स्तर पर लंबित मामलों के निष्पादन, अभिलेख संधारण और जनसेवा की गति में प्रत्यक्ष सुधार की अपेक्षा है।
अमीन संवर्ग: नई नियमावली, तीन-स्तरीय पद सोपान
भूमि मापी व्यवस्था को समयबद्ध और तकनीक-संपुष्ट बनाने के लिए अमीन संवर्ग को भी राज्य स्तरीय दर्जा दिया गया है। इसके तहत बिहार अमीन संवर्ग नियमावली, 2025 लागू की गई है। अब अमीन संवर्ग में तीन-स्तरीय पद सोपान निर्धारित है, अमीन, अमीन ग्रेड-1 और प्रधान अमीन। राज्य में अमीन के कुल 2502 स्वीकृत पद हैं, जिनमें लगभग 1199 कार्यरत हैं। शेष रिक्तियों के रोस्टर क्लियरेंस के बाद 765 पदों पर नियमित नियुक्ति हेतु प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा गया है।
अंत में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व अभिलेखों को अब ऑनलाइन उपलब्ध कराया जा रहा है। एक जनवरी से चिरकुट से दस्तावेज निकालने की व्यवस्था बंद कर दी गई है। लोगों को इसमें परेशानी न हो इसके लिए प्रत्येक अंचल में अंचल अभिलेखागार भवन स्थापित किये गए हैं। अपने बजट भाषण में उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विभाग “लंबित” से “लक्षित” कार्यसंस्कृति की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है, जहाँ जनविश्वास, पारदर्शिता और समयबद्ध सेवा ही राजस्व प्रशासन की पहचान बनेगी। इसलिए विभाग ने अपना ध्येय वाक्य स्पष्ट भू-सम्पदा, सुशासन, समृद्धि से शांति सर्वदा को बनाया है।