पटना/बाढ़ : पटना जिला ग्रामीण के बाढ़ थाना क्षेत्र के बुढनीचक गांव में मैट्रिक परीक्षा में असफल होने के बाद एक दिव्यांग छात्रा द्वारा आत्महत्या किए जाने से पूरे परिवार में मातम छा गया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। दिव्यांग छात्रा अंजली कुमारी मैट्रिक परीक्षा में गणित विषय में ‘क्रॉस’ लगने के कारण असफल हो गई थी, जिससे वह काफी तनाव में थी। वह जन्म से ही दोनों पैरों से दिव्यांग थी। बताया जाता है कि उसे पिछले दो वर्षों से सरकार की ओर से मिलने वाली दिव्यांग पेंशन भी नहीं मिल पाई थी, जिससे परिवार पहले से ही परेशान था।
अंजली के पिता धर्मवीर खेती-किसानी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। परिवार को उम्मीद थी कि अंजली के मैट्रिक पास करने पर सरकार से कुछ आर्थिक सहायता भी मिलेगी। हालांकि, परीक्षा परिणाम आने के बाद पिता ने बेटी को समझाया और अगली बार मेहनत कर परीक्षा देने का भरोसा भी दिलाया था। परिजनों के अनुसार, घटना के दिन घर की महिलाएं खाना बनाने के बाद आराम कर रही थीं।
अंजली अपने कमरे में चली गई और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। काफी देर तक जब वह बाहर नहीं निकली, तो परिवार के लोगों को संदेह हुआ। दरवाजा तोड़कर अंदर जाने पर अंजली को बिस्तर पर मृत अवस्था में पाया गया। यह देख पूरे परिवार में कोहराम मच गया। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग भी मौके पर जुट गए और परिजनों को सांत्वना देने लगे। अंजली की मौत की खबर से पूरे इलाके में शोक की लहर फैल गई।
बताया जाता है कि परिजनों ने कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए बिना पुलिस को सूचना दिए ही शव को जुगाड़ वाहन से गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया। इस संबंध में बाढ़ थाना अध्यक्ष ब्रजकिशोर सिंह ने बताया कि उन्हें इस घटना की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।मृतका के दादा ने बताया कि अंजली दोनों पैरों से दिव्यांग होने के कारण चलने-फिरने में असमर्थ थी, फिर भी वह पढ़ाई में सामान्य थी और घर के कामों में भी सहयोग करती थी। मैट्रिक का परिणाम आने के बाद उसके चेहरे पर किसी प्रकार का तनाव नहीं दिख रहा था।
वहीं, मृतका की बड़ी बहन ने बताया कि वह खाना बनाने के बाद पड़ोस में चली गई थी। कुछ समय बाद लौटने पर उसने कमरे का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों को बुलाकर दरवाजा खोला गया, जहां अंजली मृत अवस्था में मिली। अंजली गणित विषय में असफल होने के कारण मैट्रिक परीक्षा में फेल हो गई थी। पिता ने उसे ढांढस बंधाते हुए कहा था कि वह स्वयं भी दो बार मैट्रिक में असफल हो चुके हैं और अगली बार वह जरूर पास हो जाएगी। इसके बावजूद उसने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।
सत्यनारायण चतुर्वेदी की रिपोर्ट