अरवल – मुख्यालय शहर का बाजार जाम से त्रस्त है। जिसका प्रतिकूल असर लोगों पर प्रतिदिन पड़ रहा है। स्कूल बस समय पर स्कूल तक नहीं पहुंच पा रही है। जाम के कारण 2 से 5 मिनट देर परीक्षार्थियों के पहुंचने पर परीक्षा से वंचित होना पड़ रहा है। दुकानदारों की दुकानदारी ठप्प है। लोगों की जीविका पर भारी असर पड़ रहा है। सोन नदी से अनियंत्रित बालू का खनन बदस्तूर जारी है। बालू की लूट पर सरकार का नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। लिहाजा, कम से कम बालू लदे ट्रक को दिन में रोक लगा दी जाए। भोजपुर से आने वाले बालू से लदे ट्रक को अरवल के रास्ते जाने पर दिन में रोक लगाना अति आवश्यक माना जा रहा है।
अरवल बाजार जाम से त्रस्त होने के कारण व्यवसाईयों की दुकानदारी ठप है। उनकी जीविका संकट में है। परिवार को चलाना मुश्किल हो गया है। कई दुकानदारों को जिनका अपना मकान नहीं है दुकान का किराया घर से देना पड़ रहा है। लिहाजा, दुकानदारों ने 23 फरवरी को बाजार बंद करने का ऐलान किया है। दुकानदारों ने जाम से निजात पाने का प्रतिवाद शुरू किया है और मांग किया है कि जाम से छुटकारा के लिए जिला प्रशासन कोई ठोस कदम उठाए।
भाकपा माले के पूर्व विधायक महानंद सिंह ने जाम से छुटकारा के लिए विधानसभा में सवाल उठाया था और डीएम को आवेदन देकर दिन में बालू लदे ट्रक पर रोक लगाने की मांग की थी। कुछ दिन इसका अनुकरण किया गया। अब फिर से वह बदस्तूर जारी है। भाकपा माले व्यवसाईयों के साथ खड़ा है और उनके द्वारा 23 फरवरी को आयोजित बाजार बंद का समर्थन किया है। भाकपा माले के एक प्रतिनिधि मंडल जिलाधिकारी से मिलकर आवेदन दिया है। डीएम से तत्काल कदम उठाने की मांग किया है। ताकि अरवल बाजार को जाम से राहत मिल सके।
देवेंद्र कुमार की रिपोर्ट