पटना : दुलारचंद हत्याकांड में करीब चार महीने जेल में बिताने के बाद बाहर आए मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह एक बार फिर सियासत के केंद्र में हैं। शनिवार को अनंत सिंह पटना स्थित केंद्रीय मंत्री और मुंगेर सांसद ललन सिंह के आवास पर पहुंचे, जहाँ दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में मुलाकात हुई। हालांकि, समर्थकों द्वारा इसे एक ‘शिष्टाचार मुलाकात’ बताया जा रहा है, लेकिन बिहार के बदलते राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच इस मिलन को बेहद अहम माना जा रहा है।
मालूम हो कि बीते 23 मार्च को पटना हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिलने के बाद बेऊर जेल से रिहा हुए अनंत सिंह ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। शनिवार को वे सीधे ललन सिंह के सरकारी आवास पहुंचे। सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच बिहार के ताजा सियासी हालात और क्षेत्रीय विकास के मुद्दों पर चर्चा हुई। मुंगेर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मोकामा के विधायक होने के नाते, ललन सिंह और अनंत सिंह के बीच की यह केमिस्ट्री आने वाले दिनों में क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों को नई दिशा दे सकती है।
अनंत सिंह को हाईकोर्ट के जस्टिस रुद्र प्रकाश मिश्रा की एकलपीठ ने शर्तों के साथ जमानत दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी गवाह या सूचक को डराने या प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे। हर न्यायिक सुनवाई में उनकी भौतिक उपस्थिति अनिवार्य होगी। आदेश के उल्लंघन पर जमानत तत्काल रद्द कर दी जाएगी। दरअसल, 2025 विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान हुई दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में अनंत सिंह को 1 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था।
मोकामा विधायक अनंत सिंह पर दुलारचंद के पैर की एड़ी में गोली मारने का आरोप था। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मामले में नया मोड़ ला दिया। रिपोर्ट के अनुसार, दुलारचंद की मौत गोली से नहीं, बल्कि लाठी-डंडों के प्रहार और वाहन से कुचलने के कारण फेफड़े फटने और पसलियां टूटने से हुई थी। साथ ही, घटनास्थल पर विधायक की मौजूदगी के पुख्ता साक्ष्य न मिलने पर कोर्ट ने उन्हें राहत दी। बता दें कि ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर अनंत सिंह का मोकामा और आसपास के इलाकों में बड़ा जनाधार माना जाता है। ऐसे में जेल से बाहर आते ही उनका जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व से मिलना 2026 की भावी राजनीतिक बिसात का हिस्सा माना जा रहा है।