वामन भगवान की जन्मभूमि का गौरव स्थापित होने के साथ सिद्धाश्रम बक्सर का विरासत विश्व के समक्ष संपूर्ण रूप में आने लगा है। सिद्धाश्रम बक्सर भारत का वह तीर्थ है जिसे महर्षि वाल्मीकि ने हमारी सांस्कृतिक पूंजी व प्राचीन ज्ञान परंपरा की आदिभूमि बताया है। काल के प्रभाव से यह तीर्थ सुषुप्तावस्था में चला गया था। मुख्यमंत्री श्रीसम्राट चौधरी की प्रबल राजनीतिक इच्छाशक्ति के परिणाम स्वरूप इस तीर्थ का मौलिक स्वरूप अब उभरने लगा है। यहां तीर्थ पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं।
यह स्पष्ट होने लगा है कि विश्व का 21वीं सदी भारत का होने वाला है। विश्व में भारत की पहचान समृद्ध व्यावसायिक देश की नहीं रही है। अपनी समृद्ध ज्ञान परंपरा और संस्कृति के कारण भारत विश्व में अद्वितीय देश रहा है। पुराण और रामायण जैसे ग्रंथों में हमारे देश का इतिहास संकलित व संरक्षित है। इन ग्रंथों का स्पष्ट संदेश है कि मानवता विरोधी मानसिकता व राक्षसी शक्तियों के समूल नाश का संकल्प व उसकी तैयारी इसी पुण्यभूमि से हुई थी।
हमारी सांस्कृति व ज्ञान परंपरा की धारा जब कमजोर हुई तब हमारा देश गुलामी का दंश झेलने के लिए मजबूर हुआ। विश्व के जीडीपी व व्यापार में 30 प्रतिशत से भी अधिक की भागीदारी रखने वाला भारत पिछड़ता चला गया। गिरते-गिरते हम अविकसित देशों की श्रेणी में आ गए थे। हम आजाद हुए और विकासशील देश बने। हमारे प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्र मोदी का संकल्प है कि आजादी के शताब्दी वर्ष में हम विकसित देशों की कतार में खड़े होंगे।
प्रकृति ने शुभ संकेत देना शुरू कर दिया है। सबसे पहले श्रीरामलला की जन्मभूमि को लेकर फैले भ्रम के बादल छंट गए। इसके बाद उस परमतीर्थ का संपूर्ण इतिहास प्रकट होने लगा है जहां श्रीराम ब्रह्मांड नायक बने थे। वह तीर्थ है बिहार का सिद्धाश्रम बक्सर। यह भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्याजी एवं माता सीता की प्राकट्य भूमि सीतामढ़ी व जनकपुर से भी प्राचीन व महत्वपूर्ण है क्यांेकि इसी भूमि के बाबा विश्वमित्र ने राम और सीता का मिलन कराया था। इस प्रकार श्रीराम के अवतार के हेतू को पूर्ण करने वाले इस पुण्यभूमि के बिना भारत के सामर्थ्य के जागरण का कोई भी प्रयास सफल नहीं हो सकता।
सिद्धाश्रम बक्सर ज्ञान के सानिध्य में उत्सव का तीर्थ है। इस तीर्थ को युग के अनुसार विकसित करने के प्रयास नही हुए क्योंकि इसका इतिहास किसी राजा का इतिहास नहीं बल्कि राजा को शासन करने व देश की रक्षा में समर्थ बनाने का इतिहास रहा है। अतः इस अतिप्राचीन तीर्थ के विकास की ऐसी योजना होनी चाहिए जहां आज के विश्व के लिए आवश्यक ज्ञान व संस्कृति जीवंत मिले।
वामन भगवान मन की विकृति दूर कर मानव को तनाव से मुक्त करने का मार्ग दिखाते हैं। इस तीर्थ में मानव को मन से स्वस्थ बनाने का सामर्थ्य है। बस उस सामर्थ्य को आधुनिक केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है।
गंगा के पावन तट पर काशी के करीब स्थित यह तीर्थ उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने वाला जीवंत केंद्र रहा है। पूर्व में सिद्धाश्रम स्थित प्रथम रामेश्वर के पास गंगा से जलग्रहण कर श्रद्धालु दक्षिण में रामेश्वर जाते थे और भगवान रामेश्वर का अभिषेक करते थे। मुगल काल में वह परंपरा मंद पड़ गयी।
मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी आधुनिक शहरों का निर्माण कराकर विकास की कीर्तिमान रचने की ओर अग्रसर है। इसमें सिद्धाश्रम बक्सर की महत्वपूर्ण भूमिका है।