नवादा : संतान की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना को लेकर मनाया जाने वाला जितिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत का आगाज हुआ। तीन दिनों तक चलने वाले इस पर्व को लेकर नवादा शहर और आसपास के इलाकों में घरों में तैयारियां शुरू हो गयी हैं। परंपरा के अनुसार व्रती महिलाएं नहाय-खाय से पर्व का आगाज किया। 3 अक्टूबर को मुख्य निर्जला व्रत रखा जायेगा। 4 अक्टूबर को पारण के साथ पर्व का समापन होगा।
जितिया पर्व के पहले दिन 2 अक्टूबर, शुक्रवार की सुबह नहाय-खाय के साथ आरंभ हो गया। महिलाएं सुबह स्नान करने के बाद शुद्धता और सात्विकता का ध्यान रखते हुए भोजन ग्रहण किया। पारंपरिक रूप से नहाय-खाय के दिन नोनी का साग, मडुआ की रोटी और झिंगनी यानी तोरी की सब्जी जैसे व्यंजन बनाने की परंपरा है। पर्व के दौरान घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखा गया।
पर्व के दूसरे दिन 3 अक्टूबर, शनिवार को जीवित्पुत्रिका व्रत रखा जायेगा। इस दिन व्रती महिलाएं संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के साथ निर्जला उपवास करेंगी। व्रत के दौरान मन, वचन और कर्म की शुद्धता को महत्वपूर्ण माना जाता है। परंपरा के अनुसार व्रती महिलाओं को क्रोध से बचने और संतान के प्रति अपशब्दों का प्रयोग नहीं करने की सलाह दी जाती है।
जितिया व्रत में भगवान जीउतवाहन की पूजा और चील-सियारिन की कथा सुनने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कथा श्रवण को व्रत की पूजा-विधि का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पहली बार जितिया व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए नहाय-खाय से लेकर पारण तक नियम-संयम और सात्विकता का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है।
तीन दिवसीय जितिया पर्व का समापन 4 अक्टूबर, रविवार को पारण के साथ होगा। इसके साथ व्रती महिलाएं निर्जला उपवास समाप्त कर भोजन ग्रहण करेंगी। पर्व को लेकर बाजारों में भी हरी सब्जियों के साथ पारंपरिक पूजा सामग्री और व्रत से जुड़े खाद्य पदार्थों की खरीदारी शुरू हो गयी है।
भईया जी की रिपोर्ट