-ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवागमन को मजबूर, शिक्षा प्रभावित
नवादा : जिले में चार दिनों से हो रही तेज बारिश ने एक बार फिर ग्रामीण बुनियादी ढांचे की पोल खोलकर रख दी है। रजौली प्रखंड क्षेत्र के हरदिया पंचायत अंतर्गत फुलवरिया डैम के समीप से गुजरने वाली परतौनिया नदी पूरी तरह उफान पर है। जंगलों पहाड़ों से आ रहे तेज पानी के बहाव ने सड़क पर बने पुल को क्षतिग्रस्त कर दिया है, जिससे पानी सीधे सड़क के ऊपर से बह रहा है। तेज धार के कारण आवागमन पूरी तरह ठप्प हो गया है और लोगों की जान पर खतरा बना हुआ है। थोड़ी सी भी असावधानी किसी बड़े हादसे को जन्म दे सकती है। इस मार्ग से गुजरने वाले दर्जनों गांवों के ग्रामीण और राहगीर रोजाना घंटों पानी कम होने का इंतजार करने को विवश हैं।
उफनती नदी के किनारे फंसे प्रभारी प्रधानाध्यापक मनोज ने बताया कि विद्यालय में अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद वापस लौट रहे थे, लेकिन नदी में आए अचानक उफान ने उनका रास्ता रोक दिया। उन्होंने बेहद व्यथित मन से बताया कि परतौनिया नदी पर बनी पुलिया लगभग दो साल पहले बनी थी, लेकिन घटिया निर्माण के कारण महज एक साल के भीतर ही पानी की तेज धार से टूटकर ध्वस्त हो गई।
पुलिया के बह जाने से स्थिति विकराल बन गई है। सरकार और प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। ऐसे में बारिश में हर दिन दो से तीन घंटे तक पानी के घटने का इंतजार करना पड़ता है। यदि सुबह के समय तेज पानी आ जाए तो स्कूल पहुंचना असंभव हो जाता है। इस मार्ग से चोरडीहा, पिपरा, परतौनिया, चरघरवा, नवाडीह और झराही जैसे कई गांवों का सीधा संपर्क प्रखंड मुख्यालय से जुड़ा है। सैकड़ों परिवारों का आवागमन इसी जर्जर और खतरनाक रास्ते पर निर्भर है।
घटनास्थल के पास लगे सरकारी निर्माण बोर्ड की जानकारी इस बदहाली की कहानी को और स्पष्ट करती है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ‘डैम से चोरडीहा’ तक कुल 13.751 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण का कार्य स्वीकृत किया गया था। परियोजना का पैकेज संख्या BR-25R-640 है।
बोर्ड पर दर्ज विवरण के अनुसार, कार्य को प्रारंभ करने की तिथि 31 दिसंबर 2018 तथा कार्य समाप्ति की निर्धारित तिथि 30 दिसंबर 2019 अंकित है। इस सड़क एवं पुलिया निर्माण का ठेका संवेदक जयजीत सिंह को दिया गया था जबकि इसकी कार्य एजेंसी ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल रजौली है। सरकारी बोर्ड पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार यह काम 2019 में ही पूरा हो जाना चाहिए था लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी पुलिया ध्वस्त पड़ी है और निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया है।
एक तरफ जहां प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर फाइलों की आवाजाही और संशोधित प्राक्कलन की प्रक्रिया जारी है वहीं दूसरी तरफ हरदिया पंचायत की आम ग्रामीणों को हर दिन जीवन और मौत के बीच से गुजरना पड़ रहा है। बहते पानी के तेज थपेड़ों के बीच से मोटरसाइकिल और पैदल निकलना किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है। दिनेश भुइंया, शंभू भुइंया, गणेश भुइयां, बहादुर मुंडा और शिक्षकों की मांग है कि जब तक नए टेंडर और पक्के निर्माण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक त्वरित राहत के रूप में वैकल्पिक व्यवस्था की जाये ताकि स्कूली बच्चों, मरीजों और आम यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस बावत कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार से विस्तार से जानकारी ली गई। कार्यपालक अभियंता ने विभागीय पक्ष रखते हुए बताया कि संवेदक जयजीत सिंह द्वारा समय पर और गुणवत्तापूर्ण काम न किए जाने के कारण उसका एकरारनामा रद्द कर दिया गया है। संवेदक के खिलाफ नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की गई, जिसके बाद संवेदक न्यायालय की शरण में चला गया।
उन्होंने स्वीकार किया कि क्षेत्र में चल रहे रेलवे निर्माण कार्य के कारण भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क और पुलिया को अत्यधिक क्षति पहुंची है. जिसके संबंध में रेलवे प्रशासन से पत्राचार किया गया। कार्यपालक अभियंता ने स्पष्ट किया कि बचे हुए शेष कार्यों और पुल-पुलिया के पुननिर्माण के लिए एक नया ‘संशोधित प्राक्कलन’ तैयार कर मुख्यालय भेजा जा चुका है। जैसे ही विभागीय स्तर पर इस प्राकलन को तकनीकी स्वीकृति और बजट आवंटन मिल जाएगा, नई निविदा जारी कर निर्माण कार्य को नए सिरे से शुरू कराया जाएगा।
भईया जी की रिपोर्ट