-खाने से सरसों तेल की झांस हुई गायब
नवादा : महंगाई का असर अब आम लोगों की रसोई पर साफ दिखाई देने लगा है। प्याज के बाद सरसों तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से गृहिणियों का घरेलू बजट बिगड़ गया है। रोजमर्रा के भोजन का प्रमुख हिस्सा माना जाने वाला सरसों तेल अब लोगों को सोच-समझकर खरीदना पड़ रहा है।
बढ़ती कीमतों के कई कारण
परिवारों ने तेल की खपत कम कर दी है, वहीं कुछ लोग सस्ते विकल्पों की ओर भी रुख कर रहे हैं। सरसों तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर घर के महीने भर के खर्च पर पड़ रहा है। दाल, सब्जी और अन्य जरूरी खाद्य सामग्री पहले से ही महंगी होने के कारण परिवारों के लिए रसोई चलाना चुनौती बनता जा रहा है।
कहती रही हैं गृहिणियां
गृहिणियों का कहना है कि पहले जिस मात्रा में सरसों तेल की खरीदारी आसानी से हो जाती थी, अब उसी बजट में कम तेल आ पा रहा है। ऐसे में भोजन बनाने से लेकर पकौड़े, पूड़ी और अन्य व्यंजन तैयार करने तक में तेल का इस्तेमाल सीमित करना पड़ रहा है। महंगाई ने रसोई के स्वाद और सोंधी खुशबू दोनों को प्रभावित किया है।
तेल महंगा होने के बाद किचन का बजट और बिगड़ गया है
सरकार का महंगाई पर कोई लगाम नहीं है। तेल महंगा होने से अब महीने में तेल की खरीदारी कम हो रही है।
– सोनी भगत, गृहिणी
सरसों के तेल का दाम आसमान छू रहा है। बाजार में आए दिन सभी सामानों के दाम एक एक कर बढ़ रहा है, वहीं सरसों तेल 220 के पार हो चुका है। अब तो सोच समझ कर तेल डालना पड़ता है।
– सुमन कुमारी, गृहिणी।
स्थानीय दुकानदारों के मुताबिक थोक बाजार में कीमतों में बदलाव होने के साथ खुदरा कीमतों पर भी असर पड़ता है। ग्राहक अब तेल खरीदने से पहले अलग-अलग दुकानों पर भाव पूछ रहे हैं। कई ग्राहक एक साथ ज्यादा मात्रा में तेल खरीदने के बजाय जरूरत के मुताबिक छोटी पैकिंग लेना पसंद कर रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि कीमत बढ़ने पर बिक्री की मात्रा पर भी असर पड़ता है।
भईया जी की रिपोर्ट