नवादा : जिले में शहर से लेकर प्रखंड क्षेत्र में हरितालिका (तीज) का महापर्व श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना को लेकर सुहागिन महिलाओं ने 24 घंटे का निर्जला-निराहार व्रत रखा। पर्व को लेकर सुबह से ही घरों में पूजा की तैयारियां शुरू हो गयी थीं। महिलाओं ने पारंपरिक परिधान पहनकर सोलह श्रृंगार किया और शिव-पार्वती की आराधना में लीन रहीं।
तीज को लेकर क्षेत्र के विभिन्न शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। महिलाओं ने भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की समृद्धि की कामना की। पूजा की थाली में फल, फूल, बेलपत्र, मिठाई, नारियल, वस्त्र सहित अन्य पूजन सामग्री सजायी गयी थी। महिलाओं ने शिव परिवार को सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, महावर और चुनरी आदि अर्पित कर अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना की।
कई स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से हरितालिका तीज व्रत की कथा सुनी। इस दौरान महिलाओं ने भजन-कीर्तन किया। पूजा के बाद ब्राह्मणों और पुरोहितों को दक्षिणा देने का संकल्प लिया। घरों में भी विशेष पूजा का आयोजन हुआ। परिवार के सदस्यों में पर्व को लेकर उत्साह रहा। कई परिवारों में मायके से बेटियों और ससुराल में बहुओं के लिए तीज के उपहार भेजे गये।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी तपस्या की स्मृति में हरितालिका तीज व्रत की परंपरा शुरू हुई। सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए यह कठिन व्रत करती हैं, जबकि अविवाहित युवतियां मनचाहे और योग्य वर की कामना से व्रत रखती हैं।
तीज पर्व को लेकर नगर और आसपास के बाजारों- कस्बों में दिनभर चहल-पहल बनी रही। महिलाओं ने फल, फूल, पूजा सामग्री, श्रृंगार का सामान, मिठाई और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी की। पर्व के कारण बाजारों में विशेष रौनक देखने को मिली। शाम तक घरों और मंदिरों में पूजा-अर्चना का सिलसिला जारी रहा। निर्जला व्रत के बावजूद महिलाओं के उत्साह और आस्था में कोई कमी नहीं दिखी।
भईया जी की रिपोर्ट