– भारतीय सनातन संस्कृति का बढ़ा वैश्विक गौरव
-मोरारी बापू ने जोड़ा गौरवपूर्ण अध्याय
पटना। विश्वविख्यात हार्वर्ड विश्वविद्यालय के कन्वेंशन हाल में (अमेरिका) में नौ दिवसीय रामकथा का आयोजन, भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान-परंपरा को मिला वैश्विक मंच। इस अवसर पर भारत सहित विश्व के विभिन्न भागों से अनेक कथाकारों, संतों एवं रामकथा-प्रेमियों ने सहभागिता से अपने देश की प्रतिष्ठा बढ़ी। उपर्युक्त बातें भारत साधु समाज के महामंत्री स्वामी केशवानंद जी ने बतायी। उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और श्रीरामचरितमानस के सार्वभौमिक संदेश को विश्वभर में प्रतिष्ठित करने वाले पूज्य मोरारी बापू ने अपनी रामकथा यात्रा के माध्यम से एक और गौरवपूर्ण अध्याय जोड़ा है। मात्र 12 वर्ष की आयु में रामकथा का प्रवाह प्रारंभ करने वाले पूज्य बापू आज अपनी दीर्घ आध्यात्मिक यात्रा के क्रम में विश्व के अनेक प्रतिष्ठित स्थलों पर कथा कर चुके हैं।
पूज्य मोरारी बापू की कथा-यात्रा केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं रही है। उन्होंने भारत और विश्व के अनेक पवित्र तीर्थस्थलों, महापुरुषों की जन्मभूमियों, पावन नदियों के तटों तथा कुंभ क्षेत्रों में श्रीरामकथा का आयोजन किया है। उनकी कथाओं का प्रमुख संदेश प्रेम, करुणा, मानवता और सामाजिक समरसता है। स्वामी जी के अनुसार, उनकी उपस्थिति में विश्व के प्राचीनतम ज्ञान-केंद्रों में से एक नालंदा तथा इंग्लैंड के प्रतिष्ठित कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय जैसे महान शिक्षण संस्थानों में रामकथा के पश्चात अब अमेरिका के विश्वप्रसिद्ध हार्वर्ड विश्वविद्यालय में कथा का आयोजन भारतीय संस्कृति के लिए एक विशेष उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
हार्वर्ड विश्वविद्यालय परिसर में कथा आयोजन की अनुमति और समन्वय में प्रोफेसर डायना के प्रयासों का विशेष योगदान रहा। पूज्य स्वामी केशवानंद जी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे और सम्मान समारोह की गरिमा में वृद्धि की। तुलसी जयंती के पावन अवसर पर भारतीय धर्म, दर्शन एवं धर्मग्रंथों का अध्ययन करने वाले अमेरिकी विद्वानों एवं प्रोफेसरों को स्वामी केशवानंद जी और पूज्य मोरारी बापू द्वारा सम्मानित किया गया।
इन विद्वानों ने भारतीय ज्ञान-परंपरा एवं धर्मग्रंथों के अध्ययन और शोध के माध्यम से भारतीय संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समझने और प्रतिष्ठित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सनद रहे कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय का नाम जॉन हार्वर्ड की स्मृति में रखा गया है। जॉन हार्वर्ड एक ईसाई धर्मगुरु और विद्वान थे, जिन्होंने अपनी संपत्ति एवं पुस्तकों का महत्वपूर्ण हिस्सा नवस्थापित शिक्षण संस्था के लिए समर्पित किया था। आज यह विश्वविद्यालय विश्व के प्रमुख शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों में गिना जाता है।