आरक्षण पर NDA के घटक दलों के बीच SC कोटे के उप-वर्गीकरण को लेकर तकरार के बीच अब इसमें भाजपा के दलित विधायक भी कूद पड़े। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच चल रही बयानबाजी के बीच मंत्री और BJP विधायक लखेंद्र पासवान ने दोनों नेताओं को सलाह देते हुए कहा है कि दलितों के उत्थान की बात करने से पहले नेताओं को परिवारवाद के मोह से बाहर निकलना होगा। ऐसा करने पर ही समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को असल में फायदा मिल सकता है। लखेंद्र पासवान ने कहा कि वह चिराग पासवान या जीतन राम मांझी से इस्तीफा देने के लिए नहीं कह रहे हैं। दोनों NDA के बड़े नेता हैं और केंद्र सरकार में मंत्री हैं। उन्होंने कहा कि दोनों ही NDA के वरिष्ठ नेता हैं और केंद्र सरकार में मंत्री हैं। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि जो लोग दूसरों से इस्तीफा मांग रहे हैं, वे ऐसा करना जारी रख सकते हैं।

भाजपा नेता और मंत्री लखेंद्र पासवान ने कहा कि वे खुद भी दलित समाज से आते हैं और समाज के अधिकारों की बात करने से पहले हर नेता को अपने भीतर झांककर देखना चाहिए कि वह समाज के प्रति कितना ईमानदार है। जीतन राम मांझी द्वारा उठाए गए उप जातियों के पिछड़ेपन के मुद्दे पर लखेंद्र पासवान ने कहा कि वे इस बात से पूरी तरह सहमत हैं, लेकिन इसके लिए मांझी को अपने परिवार के दायरे से बाहर निकलना चाहिए। उन्होंने कहा कि मांझी जी एक बड़े नेता हैं, उन्हें मुसहर समाज के कम से कम पांच आम कार्यकर्ताओं को आगे लाकर विधानसभा और लोकसभा भेजना चाहिए ताकि वे विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
लखेंद्र पासवान ने कहा कि वे सिर्फ चिराग पासवान की बात नहीं कर रहे हैं, पासवान समुदाय के सभी नेताओं को उन लोगों को ऊपर उठाने के बारे में ईमानदारी से सोचना चाहिए जो पीछे छूट गए हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए त्याग करना पड़ेगा और परिवारवाद के मोह को छोड़ना पड़ेगा। उनके मुताबिक, चाहे लखेंद्र पासवान हों, चिराग पासवान हों या जीतन राम मांझी, सभी को इस सवाल पर ईमानदारी से विचार करना चाहिए। इसके साथ ही आरक्षण खत्म होने की आशंकाओं को खारिज करते हुए बीजेपी विधायक ने कहा कि आरक्षण नीति में किसी भी बदलाव के लिए संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में चर्चा की जरूरत होती है, जहां इस विषय पर कोई बात तक नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जब तक केंद्र में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार है, तब तक कोई भी आरक्षण व्यवस्था को छू भी नहीं सकता।
