नवादा : जिले के इंटर विद्यालय अकबरपुर परिसर में वर्षों से लगे हरे-भरे शीशम के पेड़ को कथित रूप से अवैध तरीके से कटवाए जाने का मामला सामने आया है। वीरेंद्र कुमार, रामाशीष मांझी और स्थानीय लोगों ने विद्यालय प्रधानाध्यापक प्रमोद घोष पर बिना वन विभाग की अनुमति के हरे शीशम के पेड़ को कटवाने का आरोप लगाया है। घटना को लेकर क्षेत्र में आक्रोश है। स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

पुराना और हरा-भरा था शीशम का पेड़
ग्रामीण रामाशीष मांझी ने बताया कि विद्यालय परिसर में लगा शीशम का पेड़ काफी पुराना और हरा-भरा था। पेड़ विद्यार्थियों और शिक्षकों को छाया प्रदान करने के साथ पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय परिसर में पेड़ों का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इससे बच्चों को स्वच्छ हवा और प्राकृतिक वातावरण मिलता है बावजूद हरे पेड़ को कटवा दिया गया।
बिना अनुमति पेड़ काटने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि पेड़ काटने से पहले वन विभाग अथवा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से आवश्यक अनुमति नहीं ली गयी। लोगों का कहना है कि किसी सरकारी या सार्वजनिक परिसर में हरे पेड़ को काटना आवश्यक हो, तो इसके लिए निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि पेड़ काटने की अनुमति किसने दी?
पेड़ कटने की जानकारी से ग्रामीणों में नाराजगी
घटना की जानकारी फैलते ही स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गयी। कई लोगों ने कहा कि एक ओर प्रशासन की ओर से वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के लिए अभियान चलाया जा रहे है, वहीं दूसरी ओर हरे-भरे पेड़ों की कटाई चिंता का विषय है। लोगों ने कहा कि विद्यालय परिसर जैसे स्थान पर पेड़ों की सुरक्षा की जिम्मेदारी और भी महत्त्वपूर्ण हो जाती है।

कहते हैं डीएफओ
मामले को लेकर डीएफओ श्रेष्ठ कृष्ण ने बताया कि विद्यालय परिसर में हरे पेड़ की कटाई उनके संज्ञान में नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि हरे पेड़ की अवैध कटाई की गयी है, तो मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
बता दें इसके पूर्व अकबरपुर के निवर्तमान थानाध्यक्ष अजय कुमार द्वारा थाना परिसर के बाहर कृषि फार्म का हरा शीशम वृक्ष कटवा अपने निजी उपयोग में लाया गया था। तब मामला अखबारों की सुर्खियां बनी थी। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मामले को दबा दिया गया था। ऐसे में कहीं इस मामले को भी दबा दिया जाय तो कोई आश्चर्य नहीं।

भईया जी की रिपोर्ट
