जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने आज सोमवार को बांकीपुर विधानसभा के निर्वाचित जन प्रतिनिधि के तौर पर बिहार विधानसभा के सदस्य पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह सुबह 10:30 बजे विधानसभा की मुख्य इमारत में बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार के कार्यालय कक्ष में हुआ जहां स्पीकर प्रेम कुमार के सामने उन्होंने शपथ लिया। शपथ लेने के ठीक बाद प्रशांत किशोर लखीसराय के लिए रवाना हो गए जहां अशोक धाम में भगदड़ मचने से सात महिलाओं की मौत हो गई है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने अपने चेंबर में उन्हें शपथ दिलाई। शपथ के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि आज का दिन उनके लिए बेहद उत्साह का दिन है। उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा सिर्फ एक सदन नहीं है, बल्कि यहां से बिहार की राजनीति और विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। इस दौरान खास बात यह रही कि पीके ने कर्पूरी, लालू, रामविलास, नीतीश और सुशील मोदी के योगदानों का भी जिक्र किया।
शपथ के बाद मीडिया को दिए अपने बयान में प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति के अलग-अलग दौर और अलग-अलग धाराओं के नेताओं का एक साथ उल्लेख किया। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने खुद को किसी एक राजनीतिक धारा तक सीमित न रखने का संकेत भी दिया। प्रशांत किशोर ने कहा कि जिस सदन के सदस्य कर्पूरी ठाकुर, श्रीकृष्ण सिंह, नीतीश कुमार, लालू प्रसाद, रामविलास पासवान और सुशील मोदी जैसे नेता रहे हैं, उस सदन का सदस्य बनना उनके लिए गौरव की बात है। इन नेताओं ने अपने जीवन का बहुमूल्य समय बिहार के लिए काम करने में लगाया और वे इसे अपने लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी मानते हैं। ऐसे में इनसे प्रेरणा लेकर वह बिहार के लिए काम करेंगे। साफ है कि प्रशांत किशोर आने वाले दिनों में अपनी राजनीति में एक व्यापक और अलग लकीर खींचने की कोशिश करेंगे।
शपथ के बाद प्रशांत किशोर का यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि वह पहली बार बिहार विधानसभा के भीतर सक्रिय भूमिका निभाएंगे। प्रशांत किशोर बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को हराकर जन सुराज पार्टी के पहले निर्वाचित विधायक बने हैं। यह परिणाम चुनावी राजनीति में आने के बाद किशोर की पहली चुनावी जीत थी और अपेक्षाकृत नई पार्टी के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी। सियासी संकेतों से यह साफ जाहिर हो रहा है कि प्रशांत किशोर अब बिहार की पारंपरिक जाति-आधारित और परिवारवादी राजनीति के बजाय मुद्दा-आधारित वैकल्पिक राजनीति का मॉडल पेश करने वाले है। उनके विचारों से युवा और शहरी मतदाताओं में आकर्षण बढ़ा है। अगर जनसुराज पार्टी इसी गति से आगे बढ़ती है तो बिहार में एनडीए बनाम महागठबंधन वाली व्यवस्था को एक तीसरे मोर्चे की चुनौती मिल सकती है।