नवादा : जिला अब नीली क्रांति के दौर में प्रवेश कर रहा है। मत्स्य विभाग की कोशिशों से किसान अब मछलियों के साथ-साथ मोती और झींगा भी पैदा करेंगे। जिले में आधुनिक तकनीकों और सरकारी प्रोत्साहन से उच्च लाभ वाले ये व्यवसाय शुरू होने वाले हैं, जिससे किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है। पहल: -मोती व झींगा उत्पादन से जिले में बदलेगी मत्स्य पालन की सूरत पारम्परिक खेती और सामान्य मछली पालन से अलग जिला अब नीली क्रांति के एक नए और आधुनिक दौर में कदम रखने जा रहा है।
जिले में मत्स्य पालन को अधिक लाभदायक और आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए मत्स्य विभाग ने बड़ी पहल की है। जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग के साझा प्रयासों से जिले के किसान अब पोखरों-जलाशयों में सिर्फ मछलियां ही नहीं पालेंगे, बल्कि कीमती मोती और झींगा का उत्पादन कर अपनी तकदीर चमकाएंगे। साथ ही, जिले की तस्वीर भी बदलेंगे। जिला मत्स्य पदाधिकारी मनीष कुमार कुंदन ने बताया कि विभाग ने जिले के विभिन्न प्रखंडों में विशेष योजनाओं के तहत लाभार्थियों का अंतिम चयन कर लिया है और सीड स्टॉकिंग (बीज डालने) की प्रक्रिया भी सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। जल्द ही यह महत्वाकांक्षी योजना धरातल पर पूरी तरह से आकार लेगी।
जिले में मोती और झींगा जैसी आधुनिक खेती की यह पहल न केवल किसानों की आय दोगुनी करने में मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि जिले को मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में एक नई पहचान भी दिलाएगी। जिला मत्स्य विकास पदाधिकारी सह नोडल पदाधिकारी नंदन कुमार ने बताया कि पारम्परिक मत्स्य पालन की तुलना में मोती और झींगा का व्यवसाय कई गुना अधिक मुनाफा देने वाला माना जाता है।
जिले में पहली बार इन दोनों आधुनिक विधाओं को इतने बड़े पैमाने पर सरकारी प्रोत्साहन के साथ शुरू किया जा रहा है। जिले के पकरीबरावां और अकबरपुर प्रखंडों में मोती पालन की दो इकाइयों की स्वीकृति दी गई है। मोती पालन के लिए प्रति इकाई लागत 2 लाख 24 हजार 600 रुपये निर्धारित की गई है। मोती की बाजार में भारी मांग और उच्च मूल्य को देखते हुए यह इकाई क्षेत्र के किसानों के लिए बेहद परिवर्तनकारी साबित होगी। वैज्ञानिक तकनीक से सिप में मोती तैयार करने की यह विधि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी।
जिले के सिरदला प्रखंड में झींगा पालन की एक इकाई स्थापित की जा रही है। नंदन कुमार ने बताया कि झींगा पालन के लिए प्रति इकाई लागत 1.10 लाख रुपये तय की गई है। झींगा की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जबरदस्त मांग रहती है। सिरदला में इस पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने से जिले के अन्य किसानों को भी कम जगह में अधिक मुनाफा कमाने की प्रेरणा मिलेगी।
मोती और झींगा पालन के अलावा जिला मत्स्य विभाग ने अन्य व्यावसायिक प्रजातियों के संवर्धन पर भी ध्यान केंद्रित किया है। पकरीबरावां और सिरदला प्रखंड में कैटफिश पालन की दो इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। प्रति इकाई लागत 1.35 लाख रुपये रखी गई है। स्थानीय बाजारों में मांग अधिक होने के कारण कैटफिश उत्पादन से किसानों को तत्काल और बेहतर नकदी लाभ मिल सकेगा। वारिसलीगंज प्रखंड में माइनर कॉर्प की तीन इकाइयां स्वीकृत की गई हैं। इसकी प्रति इकाई लागत 94 हजार रुपये है। इससे पारंपरिक मत्स्य पालकों को आधुनिक संसाधनों से लैस होने का अवसर मिलेगा।
किसानों और मत्स्य पालकों पर आर्थिक बोझ न पड़े और वे बिना किसी झिझक के इन नई तकनीकों को अपना सकें, इसके लिए सरकार की ओर से सभी योजनाओं पर 60 प्रतिशत का अनुदान देय है। इस प्रकार, कुल योजना लागत का बड़ा हिस्सा सरकार वहन करेगी, जिससे कम पूंजी वाले किसान भी इन उच्च-लाभ वाली योजनाओं से जुड़ सकेंगे।
योजना को पूरी निष्पक्षता के साथ धरातल पर उतारने के लिए चयन प्रक्रिया को बेहद सख्त रखा गया। जिला मत्स्य पदाधिकारी मनीष कुमार कुंदन ने बताया कि सभी स्वीकृत इकाइयों के लिए आवेदकों का चयन प्रमंडल स्तर पर डिप्टी डायरेक्टर की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति द्वारा पारदर्शी तरीके से पूरा कर लिया गया है। योजना की वर्तमान स्थिति की जानकारी देते हुए जिला मत्स्य विकास पदाधिकार सह नोडल पदाधिकारी नंदन कुमार ने बताया कि लाभार्थियों के चयन के साथ-साथ सभी चयनित इकाइयों में सीड स्टॉकिंग (बीज भंडारण व रोपण) का कार्य भी पूरा कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि विभाग की तैयारी पूरी है और बेहद जल्द इस महत्वाकांक्षी योजना पर पूर्ण रूप से अमल शुरू हो जाएगा।
भईया जी की रिपोर्ट