पटना/हाजीपुर (वैशाली) : नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित तीसरे अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा पत्रकारिता सम्मेलन-2026 में वैशाली जिले के निवासी एवं बिहार के वरिष्ठ पत्रकार तथा बज्जिका भाषा के प्रबल समर्थक डॉ. शशि भूषण कुमार को सम्मानित किया गया। उन्हें वैशाली की मातृभाषा बज्जिका के संरक्षण, संवर्धन तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मान प्रदान किया गया।
सम्मेलन का उद्घाटन नेपाल के कानून मंत्री ने किया। कार्यक्रम में नेपाल के सांसदों, नगर प्रमुखों, पत्रकारों, भाषाविदों तथा सामाजिक क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में नेपाल, भारत, बांग्लादेश, भूटान और सऊदी अरब सहित विभिन्न देशों से पत्रकार एवं प्रतिनिधि शामिल हुए।
सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. शशि भूषण कुमार ने कहा कि “बज्जिका केवल एक भाषा नहीं, बल्कि वैशाली की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक विरासत की पहचान है।” उन्होंने कहा कि वैशाली को लोकतंत्र की प्राचीन धरती बताते हुए बज्जिका को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाना उनका निरंतर मिशन है।
उन्होंने कहा कि मातृभाषा के माध्यम से किसी देश की संस्कृति, सभ्यता और सामाजिक विरासत को पूरी दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जा सकता है। उनका उद्देश्य है कि लोकतंत्र की धरती वैशाली से जुड़ी बज्जिका की आवाज दुनिया के लोकतांत्रिक देशों तक पहुंचे तथा भाषाई एवं सांस्कृतिक संवाद के माध्यम से आपसी भाईचारे, सद्भाव और विश्व शांति को मजबूत किया जा सके।
डॉ. कुमार ने वैशाली की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह धरती भगवान महावीर की जन्मस्थली और भगवान बुद्ध की कर्मभूमि रही है। अहिंसा, शांति और मानवता के इन संदेशों को मातृभाषाओं एवं सांस्कृतिक संवाद के माध्यम से विश्व समुदाय तक पहुंचाना वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
सम्मेलन में भारत से पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में अजीत कुमार, कृष्ण मोहन कुमार सहित अन्य प्रतिनिधि शामिल रहे। वहीं, वीरगंज से पत्रकार शैलेश कुमार ने भी सम्मेलन में सहभागिता की। आयोजन समिति की ओर से प्रतिनिधियों को ‘लव टोकन’ (Love Token) के रूप में सम्मान-स्मृति चिह्न प्रदान किया गया।
काठमांडू में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बिहार की बज्जिका भाषा की आवाज अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंजी। डॉ. शशि भूषण कुमार को बज्जिका भाषा एवं उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए मिला सम्मान बिहार और वैशाली के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने दोहराया कि बज्जिका को दुनिया के लोकतांत्रिक देशों तक पहुंचाना और मातृभाषा के माध्यम से भाईचारे एवं शांति का संदेश देना उनका निरंतर मिशन है।
सत्यनारायण चतुर्वेदी की रिपोर्ट