बांकीपुर उपचुनाव के लिए नामांकन का दौर समाप्त होने के बाद अब सबकी नजरें चुनाव प्रचार और रणनीतिक तैयारी पर है। इसी को लेकर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अब पटना में खुद मोर्चा संभाल लिया है। बांकीपुर उपचुनाव के लिए नितिन नवीन ने पटना में ही डेरा जमा लिया है और लगातार पार्टी प्रत्याशी की जीत के लिए रणनीति बनाने में मशगुल हैं। दरअसल, बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर के चुनावी मैदान में उतरने से यहां मुकाबला कठिन हो गया है। एक ओर पीके जहां पूरी जोर लगा रहे हैं, वहीं बीजेपी ने भी अब इसे प्रतिष्ठा की लड़ाई बना लिया है। यही वजह है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने स्वयं चुनावी मोर्चा संभालने का निर्णय लिया।
इसी क्रम में आज मंगलवार को नितिन नवीन पटना में पार्टी नेताओं, बांकीपुर विधानसभा के कार्यकर्ताओं और एनडीए के सहयोगी दलों के साथ अलग-अलग बैठक कर रहे हैं। प्रशांत किशोर के मैदान में आने और भाजपा का प्रत्याशी बदलने के वाकये के बाद यहां बीजेपी की प्रतिष्ठा जुड़ चुकी है। पटना पहुंचे नितिन नवीन बीजेपी प्रदेश कार्यालय में पार्टी के शीर्ष नेताओं और बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस बैठक में जमीनी स्तर पर वोटरों को साधने और विपक्ष के हमलों का जवाब देने की अंतिम रणनीति तैयार की जाएगी। यही नहीं, बैठक में प्रचार का पूरा रोडमैप फाइनल किया जाएगा। भाजपा ने बांकीपुर चुनाव को पूरी तरह से माइक्रो-मैनेजमेंट के आधार पर लड़ने का निर्णय किया है। इसके तहत हर एक वार्ड, मोहल्ले और बूथ के लिए अलग-अलग वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारियां तय की गई हैं। बैठक में आने वाले दिनों के लिए बड़े रोड शो, जनसंपर्क अभियानों और नुक्कड़ सभाओं का पूरा कैलेंडर फाइनल किया जाएगा। इसी कड़ी में नितिन नवीन कार्यकर्ताओं में यह भरोसा फूंकने की कोशिश करेंगे कि स्थानीय स्तर पर कोई भी कसर बाकी न रहे और भाजपा इस पारंपरिक सीट पर अपना कब्जा बरकरार रख सके।
जानकारी के अनुसार आज शाम 4 बजे भाजपा प्रदेश मुख्यालय में होने वाली कोर टीम की बैठक में जहां बूथ स्तर के प्रबंधन पर चर्चा होगी, वहीं वे बांकीपुर उपचुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए (NDA) के घटक दलों के प्रमुख नेताओं के साथ भी एक साझा बैठक करेंगे. बताया जा रहा है कि इस महामंथन का मुख्य उद्देश्य सहयोगी दलों के साथ बेहतर समन्वय बनाना और चुनावी प्रचार को और ज्यादा आक्रामक रूप देना है। राजनीति के जानकार कहते हैं कि नितिन नवीन की अति सक्रियता की वजह यह है कि यह उनकी खुद की विरासत वाली सीट रही है। ऐसे में बांकीपुर विधानसभा सीट पर हो रहा यह उपचुनाव खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के लिए व्यक्तिगत रूप से प्रतिष्ठा की बड़ी लड़ाई बन चुका है। नितिन नवीन खुद इस सीट से लगातार पांच बार विधायक रह चुके हैं। 2008 के परिसीमन से पूर्व जब यह सीट पटना पश्चिमी के नाम से जानी जाती थी तब भी उनके पिता स्वर्गीय नवीन किशोर सिन्हा यहां से विधायक बनते रहे। अब जब हाल ही में भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने और उसके बाद राज्यसभा के लिए चुने जाने के कारण नितिन नवीन ने इस सीट से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद यहां उपचुनाव की नौबत आई है। ऐसे में अपने पुराने और सबसे मजबूत गढ़ में पार्टी की जीत की मार्जिन को बढ़ाने और विपक्ष को पछाड़ने के लिए वे लगातार दिल्ली से भी हर एक बूथ की माइक्रो-मॉनिटरिंग कर रहे थे और अब खुद जमीन पर उतर चुके हैं।