पटना । ए.एन. सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान (ANSISS), पटना में गुरुवार को “अनुग्रह नारायण सिन्हा स्मृति व्याख्यान-2026” का आयोजन किया गया। इस वर्ष व्याख्यान का विषय “स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों के लिए नई दिशाएँ : ज्ञान, व्यवहार एवं नीति” रखा गया था। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रो. ऋतु प्रिया, पूर्व प्रोफेसर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सामाजिक विज्ञान संकाय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), नई दिल्ली थीं। उन्होंने अपने व्याख्यान में वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों के समक्ष उभरती चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के नियोजन एवं क्रियान्वयन में सामाजिक यथार्थ, सामुदायिक सहभागिता, पर्यावरणीय चिंताओं तथा मानवीय गरिमा को केंद्र में रखकर समग्र दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. मधुमिता मुखर्जी, पूर्व प्रोफेसर, निवारक एवं सामाजिक चिकित्सा विभाग, पीएमसीएच, पटना ने की। उन्होंने कहा कि वर्तमान जनस्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान के लिए सहयोगात्मक एवं अंतर्विषयी दृष्टिकोण अनिवार्य है। उन्होंने स्मृति व्याख्यान के विषय को समयानुकूल और अत्यंत प्रासंगिक बताया।अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान की सेमिनार समिति के संयोजक एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. बिपुल कुमार ने बिहार विभूति डॉ. अनुग्रह नारायण सिन्हा के लोकसेवा, संस्थान निर्माण और सामाजिक विकास में दिए गए योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि यह वार्षिक स्मृति व्याख्यान राष्ट्रीय एवं सामाजिक महत्व के विषयों पर गंभीर विमर्श का महत्वपूर्ण मंच है।
अपने उद्घाटन संबोधन में संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर एवं कुलसचिव (प्रभारी) डॉ. हबीबुल्लाह अंसारी ने भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था के विकासक्रम पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वैश्वीकरण के बाद स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में व्यापक बदलाव आए हैं। उन्होंने कहा कि सार्वभौमिक, गुणवत्तापूर्ण एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की अवधारणा धीरे-धीरे निजी स्वास्थ्य सेवाओं की ओर अग्रसर हुई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और समानता से जुड़े नए प्रश्न सामने आए हैं।
प्रो. ऋतु प्रिया ने स्वास्थ्य की केवल जैव-चिकित्सीय (बायोमेडिकल) समझ की सीमाओं को रेखांकित करते हुए सामाजिक निर्धारकों, सामुदायिक भागीदारी और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने ऐसी स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करने की वकालत की जो सुलभ, किफायती, न्यायसंगत और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ हो तथा लोगों को अपने स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़े निर्णयों में सक्रिय भागीदारी के लिए सशक्त बनाए।
कार्यक्रम में संस्थान के संकाय सदस्यों, शोधार्थियों, फेलो एवं आमंत्रित अतिथियों ने भाग लिया। व्याख्यान के उपरांत स्वास्थ्य क्षेत्र की उभरती चुनौतियों, नीति संबंधी प्राथमिकताओं तथा भारत एवं विश्व की स्वास्थ्य प्रणालियों के भविष्य पर सार्थक चर्चा हुई। स्मृति व्याख्यान ने समकालीन स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर गंभीर चिंतन का अवसर प्रदान करने के साथ-साथ समावेशी, टिकाऊ एवं जनोन्मुख स्वास्थ्य प्रणालियों के निर्माण पर व्यापक संवाद को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रभात रंजन शाही की रिपोर्ट