नवादा : जिले में धान का कटोरा के रूप में पहचाना जाने वाला वारिसलीगंज में धान का बिजड़ा गिराने के कार्य मे तेजी आ गई है। हाइब्रिड एवं रिसर्च धान के बीजों की नर्सरी का उत्तम समय मृगशिरा नक्षत्र माना जाता है। हलांकि सूर्य देव के प्रचंड ताप से किसान परेशान हैं। क्योंकि तेज गर्मी एवं धूप के कारण बीज का अंकुरण प्रभावित होता है। बाबजूद धान की रोपनी में कम समय रहने के कारण किसान तेजी से बिजड़ा डालना शुरू कर दिया है।
वर्षा नहीं होने की स्थिति में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से सिंचाई कर किसान नर्सरी की तैयारी में जुटे हैं। जबकि आषाढ़ माह में धान रोपनी शुरू करने वाले गांवो यथा ठेरा, मंजौर, बेलधा, दोसुत आदि में किसानों की नर्सरी अगले सप्ताह में रोपनी के लायक हो जाएगी। उक्त गांव के किसान नहरी एवं बरसाती पानी के भरोसे नहीं रहकर पम्पिंगसेट की पानी से धान की रोपनी शुरू करते हैं। धान की फसल की आगत रोपनी करने वाले संबधित गांवो में मजदूर आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।
जबकि सावन माह में एक साथ हर गांव में रोपनी शुरू होने के वजह से मजदूरों की कमी पड़ जाती है। ऐसे में क्षेत्र के किसान सहरसा, पूर्णिया समेत झारखंड से धान रोपने के लिए मजदूर मंगवाते हैं। जो बेहतर ढंग से धान की रोपनी करते हैं। प्रखंड क्षेत्र के दर्जनों गांव में जिसमें प्रमुख रूप से मकनपुर, चंडीपुर ,बासोचक, लीला बीघा भुआलचक, गोपालपुर आदि में सावन प्रथम पक्ष को नाग पंचमी के बाद धान रोपनी शुरू की जाती है। फलतः संबंधित गांव के किसान मृगशिरा की शुरुआत से खेतों में बिचड़ा गिराने का कार्य शुरू करते हैं।
समय पर बिचड़ा डालना आवश्यक
अच्छी उपज देने वाली और देर से तैयार होने वाली धान की कुछ किस्म का बिचड़ा रोहन में बोआई कर ली जाती है। लेकिन नवीनतम हाइब्रिड वैरायटी की धान व कम दिनों में तैयार होने वाला धान की फसल का बिचड़ा मृगशिरा के अंत तक खेतों में डालने का कार्य किया जाता है। हलांकि मृगशिरा की भीषण गर्मी में बीजों का अंकुरण प्रभावित नहीं हो इसके लिए किसानों को हर दो दिनों बाद नर्सरी की सिंचाई करनी होती है।
भईया जी की रिपोर्ट