नवादा। बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग की सदस्य सह नवादा जिले के गोविंदपुर प्रखंड मुख्यालय पंचायत की पूर्व मुखिया अफरोजा खातून की सगी चाची वकील खातून का निधन हो गया। वे लगभग 100 वर्ष की थीं और पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रही थीं। इलाज के दौरान नवादा में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे अपने पीछे एक पुत्र, एक पुत्री और भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं।
मरहूम वकील खातून (पति: दिवंगत गुलाम हाशिम) के निधन की खबर मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर गोविंदपुर स्थित आवास पर लाया गया, शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने और अंतिम दर्शन करने के लिए स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मृतका वकील खातून अपने अंतिम समय तक अफरोजा खातून के घर पर ही रह रही थीं। मृतका और अफरोजा की माता के बीच का आपसी प्रेम और रिश्ता पूरे गोविंदपुर में एक मिसाल माना जाता था। आमतौर पर गोतनी (जेठानी-देवरानी) के रिश्तों में दिखने वाले तनाव के विपरीत, इन दोनों के बीच का अटूट स्नेह और सम्मान लोगों के लिए प्रेरणा था।
मरहूम वकील खातून के जनाजे (अंतिम यात्रा) में समाज के सभी वर्गों के लोग शामिल हुए। हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों की भारी मौजूदगी ने क्षेत्र में कौमी एकता और आपसी भाईचारे की एक अनुपम मिसाल पेश की। सभी ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी और शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
भईया जी की रिपोर्ट