पटना/बाढ़ : बाढ़ अनुमंडल के सुविख्यात उमानाथ गंगा घाट के पास गुरुवार की सुबह हुए भीषण नाव हादसे से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हादसे में नाव पर सवार 14 लोगों में से 3 लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि 4 लोग अब भी लापता हैं। एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ की टीम लगातार खोजबीन में जुटी हुई है। वहीं, 7 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है।
जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 5:45 बजे उमानाथ घाट से बिंद टोली के 14 लोग नाव (डेंगी) पर सवार होकर समस्तीपुर जिले के मोहिउद्दीननगर थाना क्षेत्र स्थित सुल्तानपुर दियारा परवल तोड़ने जा रहे थे। इसी दौरान उमानाथ घाट और सुल्तानपुर घाट के बीच तेज हवा और ओवरलोडिंग के कारण नाव अचानक पलट गई, जिससे नाव पर सवार लोग गंगा नदी में डूबने लगे। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय नाविकों, मल्लाहों एवं ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। वहीं, तीन लोगों के शव बरामद किए गए हैं और चार लोगों की तलाश जारी है।
घटना की सूचना मिलते ही बाढ़ अनुमंडल प्रशासन सक्रिय हो गया। अनुमंडल पदाधिकारी गरिमा लोहिया, पुलिस उपाधीक्षक रामकृष्ण, अंचलाधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह, थानाध्यक्ष ब्रजकिशोर सिंह सहित आपदा प्रबंधन की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिया गया। बाद में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम को भी बुलाया गया। पटना जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम. एवं ग्रामीण एसपी कुंदन कुमार ने भी घटनास्थल पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों का निरीक्षण किया तथा अधिकारियों को तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने बिना अनुमति एवं सुरक्षा मानकों के विपरीत चल रही नावों पर सख्त कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उमानाथ घाट से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग दियारा क्षेत्र में खेती एवं सब्जी कारोबार के लिए आते-जाते हैं। यहां से रोजाना करीब 20 से 25 नावों का परिचालन होता है। सब्जी व्यापार की जल्दबाजी और प्रतिस्पर्धा के कारण छोटी नावों पर क्षमता से अधिक लोगों को बैठा लिया जाता है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि 10 लोगों की क्षमता वाली नावों पर 20 से 25 लोगों को बैठाकर परिचालन किया जाता है। प्रशासन द्वारा सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन नहीं कराए जाने के कारण पूर्व में भी इस घाट पर नाव हादसे हो चुके हैं।
घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सभी गंगा घाटों पर नावों के परिचालन की नियमित जांच, लाइफ जैकेट की अनिवार्यता, क्षमता नियंत्रण तथा सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की दर्दनाक घटनाओं पर रोक लग सके।
सत्यनारायण चतुर्वेदी की रिपोर्ट