नवादा : कहते हैं अनाचार बढ़ता है कब? सदाचार चुप रहता है तब। नवादा का कोई वादा नहीं। सही काम किया तो आपको सर पर बैठा ने में भी देर नहीं बर्ना। कुछ इसी प्रकार की स्थिति डीएम की है। भले ही चाटुकारिता करने वालों के लिए वे महान हों लेकिन जिले के शांतिप्रिय लोगों की नजरों में। जिले के हर विभाग में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। डीएम का जनता दरबार झूठ का पुलिंदा बना हुआ है। साधारण भूमि की मापी के लिए भी जनता दरबार में न्याय न मिलने पर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जा रही है।
इसके एक नहीं कई पुख्ता प्रमाण मेरे पास मौजूद हैं। और तो और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के विरुद्ध वरीय पदाधिकारियों द्वारा कार्रवाई के आदेश को रद्दी की टोकरी में डाला जा रहा है। आश्चर्य यह कि पीडीएस का फर्जी अनुज्ञप्ति मामले में गठित टीम द्वारा दोषी ठहराए जाने के बावजूद अबतक कार्रवाई शून्य है। भ्रष्टाचार की अकथ कहानी है कितना प्रमाण दिया जाय। फेहरिस्त काफी लंबी है।
अब जब जिले के आरटीआई कार्यकर्ता प्रणव कुमार चर्चिल ने सूचना के अधिकार के तहत दर्जनों मामले में भ्रष्टाचार को प्रमाणित किया जिसमें कई मामले मुख्य सचिव से लेकर विभागीय सचिव के पास सुनवाई चल रही है जिसमें जिला प्रशासन की न केवल किरकिरी हो रही है बल्कि कई मामले में कार्रवाई तय है तब जिला प्रशासन बौखला गया है। की मामले में तो पहले अधिकारियों के पालतू गुंडों ने साम दाम दण्ड भेद का सहारा लिया। जब इससे भी काम नहीं बना तो डीएम समेत आरोपी अधिकारियों ने आरटीआई कार्यकर्ता समेत कई लोगों का मोबाइल नियम विरुद्ध जाकर ब्लाक कर दिया।
आरटीआई कार्यकर्ता ने डीएम के जनता दरबार में उपस्थित होकर जब मोबाइल ब्लाक करने पर नियमों के विरुद्ध का हवाला दिया तब डीएम ने केवल आग बबूला हो उठे बल्कि मोबाइल जब्त कर एक नहीं दो दो बार दुर्व्यवहार किया। आरटीआई कार्यकर्ता ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव से लेकर से लेकर तमाम अधिकारियों से इसकी शिकायत की है। इसके अलावा हाल में मुख्यमंत्री द्वारा आरंभ किये गये सहयोग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा डीएम पर शिकंजा कसने का काम किया है जिसका समाधान तीस दिनों में किया जाना है। अब इसके परिणाम का इंतजार हर किसी को रहेगा।
भईया जी की रिपोर्ट