नवादा : जिले के गोविंदपुर थाना क्षेत्र में वर्ष 2019 में अंधविश्वास के कारण हुई महिला की निर्मम हत्या के मामले में न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। एडीजे-11 आशुतोष कुमार खेतान की अदालत ने सभी आठ आरोपितों को दोषी करार देते हुए भादवि की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास व 5-5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी। साथ ही डायन एक्ट के तहत छह माह का कारावास और जुर्माना लगाया।
घटना 23 जुलाई 2019 की है, जब कोलगढ़ गांव निवासी 50 वर्षीय मंती देवी को गांव के ही कुछ लोगों ने डायन बताकर निशाना बनाया था। उन पर आरोप लगाया गया था कि तीन माह पूर्व सुरेश मांझी के पुत्र की बीमारी से हुई मौत की जिम्मेदार वही है। इसी प्रतिशोध में हमलावर लाठी-डंडे और धारदार हथियारों के साथ उनके घर में घुस गए और उन्हें चाकू व भाले से लहूलुहान कर दिया। इलाज के लिए नवादा ले जाने के दौरान रास्ते में ही उनकी मौत हो गयी थी।
इन्हें मिली सजा
न्यायालय ने जिन अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, उनमें नरेश मांझी, बिरजू मांझी, कारु मांझी, तुलसी मांझी, त्रिलोकी मांझी, पुना मांझी, राजेश मांझी और सुरेश मांझी शामिल हैं। मामले की प्राथमिकी मृतका के पुत्र कमलेश कुमार ने गोविंदपुर थाना कांड संख्या 131/19 के तहत दर्ज करायी थी। तत्कालीन थानाध्यक्ष ज्योति पुंज द्वारा किये गये सटीक अनुसंधान, गवाहों के बयान और तकनीकी साक्ष्यों ने अभियोजन पक्ष को मजबूती प्रदान की। यह फैसला समाज में अंधविश्वास के विरुद्ध एक कड़ा संदेश माना जा रहा है कि जघन्य अपराधों में न्याय की जीत सुनिश्चित है।
भईया जी की रिपोर्ट