पटना: प्राचीन भारत का इतिहास बिहार की चर्चा के बिना अधूरा है। चिरांद, चेचर और बलिराजगढ़ जैसे स्थानों पर प्रागैतिहासिक काल के अवशेष मिले हैं। बिहार में विश्व विरासत के लायक कई स्थल ऊपर उपलब्ध हैं। अभी तक यूनेस्को ने मात्र दो स्थान को ही विश्व धरोहर के रूप में चिन्हित किया है, जिसमें गया जी का महाबोधि मंदिर और नालंदा महाविहार शामिल है। उक्त विचार प्रख्यात पुरातत्ववेत्ता प्रो जयदेव मिश्र ने विश्व विरासत दिवस पर पटना में सामाजिक संस्था संधान द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यक्त किया।
उन्होंने विश्व विरासत और बिहार विषयक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार ने विश्व को शून्य का उपहार दिया था। पाणिनि ने यहां अध्ययन किया था। चरक और सुश्रुत जैसे चिकित्सकों की एक लंबी परंपरा रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने अभी जाकर निर्णय दिया है कि पिता की संपत्ति में पुत्री का भी हिस्सा है, जबकि सैकड़ों वर्ष पूर्व मिथिला में इसकी विस्तृत चर्चा हुई थी। और उनका अधिकार संरक्षित किया गया था। विश्व को गणतंत्र वैशाली के लिच्छवी गणराज्य की अनुपम भेंट है। आवश्यकता है कि हम अपने धरोहरों की संरक्षा करें और अपनी विरासत को जन-जन तक पहुंचाए।
कार्यक्रम में दिविषा ट्रस्ट के राकेश कुमार तिवारी ने भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर संगोष्ठी आयोजित करने की बात की। कार्यक्रम का मंच संचालन संधान के सचिव संजीव कुमार और धन्यवाद ज्ञापन ब्लूमिंग रोज़ पब्लिक स्कूल के निदेशक संजय कुमार ने किया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध रंगकर्मी संजय सिन्हा, संधान के कार्यकारी निदेशक आशुतोष कुमार समेत कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।