बिहार से नीतीश कुमार के जाते ही उनके ड्रीम प्रोजेक्ट शराबबंदी को खत्म करने की मांग उठने लगी है। भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार के बनते ही शराबबंदी पर विस्तृत समीक्षा की मांग एनडीए के ही घटक दल रालोमा के विधायक आनंद माधव ने नए सीएम सम्राट चौधरी से की है। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी RLM से विधायक माधव आनंद ने कहा कि विधानसभा सत्र में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने शराबबंदी की समीक्षा की मांग उठाई थी। तब कई लोगों ने दबी आवाज में मेरी मांग का समर्थन भी किया था। हालांकि उस वक्त कुछ लोगों ने इसका विरोध भी किया था, लेकिन अब वह वक्त आ गया है जब बिहार में शराबबंदी कानून की विस्तृत समीक्षा होनी चाहिए।
बिहार का राजस्व दूसरे राज्यों में जा रहा
विधायक माधव आनंद ने कहा कि वह सदन के बाहर आने पर भी इस मुद्दे पर उतने ही गंभीर थे, जितने कि सदन के अंदर। उन्होंने मांग उठाई थी कि शराबबंदी की विस्तृत समीक्षा होनी चाहिए। राज्य में एनडीए की नई सरकार बनी है। सम्राट चौधरी नए मुख्यमंत्री बने हैं। वह नई ऊर्जा के साथ काम करेंगे। बिहार जैसे लैंड लॉक स्टेट में शराबबंदी सही नहीं है क्योंकि इससे राज्य के राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है। विधायक ने कहा कि शराबबंदी की वजह से बिहार के राजस्व का पलायन झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, नेपाल जैसी जगहों पर हो रहा है। उसकी वजह से बिहार को नुकसान उठाना पड़ रहा है। इन सारी चीजों को ध्यान में रखते हुए शराबबंदी की समीक्षा होनी चाहिए। अब सरकार को जनहित को देखते हुए इस मामले में फैसला लेना है।
विदित हो कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी। लेकिन इसके बावजूद आए दिन राज्य के विभिन्न हिस्सों में शराब की तस्करी की खबरें सामने आती रही हैं। यही नहीं जहरीली शराब पीने से आम लोगों की मौत से जुड़े कई कांड भी राज्य में होते रहे हैं। मतलब यह कि भले ही शराब खुलेआम नहीं बिक रही है, लेकिन दूसरी जगहों से छिपाकर शराब की सप्लाई राज्य में जरूर हो रही है। इससे दूसरे राज्यों को राजस्व का फायदा हो रहा है और बिहार को नुकसान। बिहार के लोग शराब पी तो रहे हैं लेकिन उसका फायदा उनके राज्य को नहीं मिल रहा। इसीलिए विधायक की मांग है कि शराबबंदी की विस्तृत समीक्षा की जानी चाहिए।