सारण जिले के रसूलपुर के रहने वाले प्रसिद्ध रचनाकार मृत्युंजय दुबे ने अपनी नई साहित्यिक कृति ‘बिहारी गौरव’ के माध्यम से बिहार की कला, संस्कृति और गौरवशाली इतिहास को जीवंत कर दिया है. विगत 18 मार्च 2026 को प्रकाशित उनकी इस रचना ने न केवल साहित्य जगत में प्रशंसा बटोरी है, बल्कि स्थानीय निवासियों में भी उत्साह भर दिया है।
‘बिहारी गौरव’ में मृत्युंजय दुबे ने बिहार की मिट्टी की सुगंध, वीर गाथाओं और महान विभूतियों का सुंदर वर्णन किया है. यह रचना युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करती है. तीन अध्यायों में लिखी गई पुस्तक में लेखक दूबे ने बिहार के अलग अलग क्षेत्रों के नामचीन लोगों का चुनाव किया है. पहले अध्याय स्वतंत्रता संग्राम व राष्ट्रीय आन्दोलन में सहजानंद सरस्वती से लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक के व्यक्तित्व व कृतित्व का चित्रण है, वहीं सिनेमा, मीडिया व रचनात्मक अभिव्यक्ति अध्याय में डॉ. विवेकी राय से लेकर भिखारी ठाकुर के लौंडा नर्तक पद्मश्री रामचंद्र मांझी तक को लेखक दूबे द्वारा स्थान दिया गया है. अंतिम तीसरे अध्याय शिक्षा विज्ञान व बौद्धिक विचारक व चिंतक में विंदेश्वरी पाठक, संप्रदा सिंह और सुपर थर्टी के आनंद कुमार पर दूबे ने अपनी दृष्टि कलम से उतारी है।

मृत्युंजय दुबे बचपन से ही साहित्य और काव्य के प्रति समर्पित रहे हैं, एकमा निबंधन कार्यालय में बतौर कलर्क लंबी सेवा देने के बाद उन्होंने अपना जीवन इतिहास की गहन खोज को समर्पित कर दिया और अपनी लेखनी के माध्यम से समाज को एक नई दिशा देने का प्रयास किया है. रसूलपुर के ग्रामीण और साहित्य प्रेमी मृत्युंजय दुबे की इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं और उन्हें शुभकामनाएं दे रहे हैं। मृत्युंजय दुबे ने कहा है मेरा उद्देश्य अपनी रचना के माध्यम से बिहार के गौरवशाली इतिहास को देश-विदेश तक पहुंचाना है। ‘बिहारी गौरव’ मेरी मिट्टी के प्रति प्रेम की एक छोटी सी भेंट है।