-निजी भूमि भवन निर्माण पर रोक, सिंचाई भूमि पर अतिक्रमण की खुली छूट
नवादा : जिले में भूमि विवाद बढ़ाने में प्रशासन की भूमिका संदेह के घेरे में है। एक ओर निजी भूमि पर भवन निर्माण पर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर पुराने सर्वे के आधार पर रोक लगाया जा रहा है दूसरी ओर भू मापी की तीन तीन बार राशि जमा करने के बावजूद सीओ द्वारा मापी न करा भूमि विवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस प्रकार के एक नहीं सैकड़ों उदाहरण भरे पड़े हैं जिससे स्पष्ट पता चलता है कि भूमि विवाद बढ़ाने में जिला प्रशासन की भूमिका संदेह के घेरे में है।
ताज़ा मामला रजौली अंचल क्षेत्र के सलेमपुर गांव का है। प्लांट नम्बर 1701 पोखर की भूमि है। उक्त पोखर से गांव की सिंचाई वर्षों से होती आ रही है। उक्त टेड़ुआ की परती भूमि पर गांव के ही महेंद्र राम पिता छोटन राम, मुन्ना राम पिता विनेसर राम, अशोक राजवंशी पिता बालक राम, सुनील राजवंशी पिता क्रांति राजवंशी,कारु राम व बालक राम दोनों पिता झारो राजवंशी द्वारा अतिक्रमण कर गृह निर्माण आरंभ कर दिया गया है।
आश्चर्य यह कि सूचना अंचल अधिकारी से लेकर जिले के तमाम अधिकारियों को दिये जाने के बावजूद कार्रवाई तो दूर जांच करना तक अधिकारियों द्वारा मुनासिब नहीं समझा जा रहा है। ऐसे में कभी भी जातिय तनाव उत्पन्न होने की संभावना है। ग्रामीण मनोज सिंह, कृष्णा मुरारी,निर्भय सिंह,पुनम देवी, संध्या देवी आदि ने एक बार फिर जिले के तमाम अधिकारियों को आवेदन देकर टेड़ुआ की भूमि को अविलंब अतिक्रमण मुक्त कराये जाने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो संभावित जातिय तनाव के लिए प्रशासन जिम्मेवार होगा।
भईया जी की रिपोर्ट