मुजफ्फरपुर के पियर थाना के अपर थानाध्यक्ष SI अभिनंदन कुमार रिश्वत लेते कैमरे में कैद हो गए हैं। उनका घूस लेते एक वीडियो आज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में पियर थाना के अपर थानाध्यक्ष दारोगा अभिनंदन कुमार रिश्वत लेते साफ दिख रहे हैं। वीडियो में देखा जा रहा है कि SI अभिनंदन कुमार नूनफारा निवासी एक दलाल से पैसा ले रहे हैं। उसी समय वहां मौजूद एक शख्स ने पूरा घटनाक्रम को मोबाइल के कैमरे में कैद कर लिया। इस वीडियो के वायरल होते हुए समूचे मुजफ्फरपुर पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सोशल मीडिया पर वीडियो के वायरल होने की बात जैसे ही SSP तक पहुंची, उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए इसे अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला करार दिया तथा एसडीपीओ पूर्वी-2 मनोज कुमार सिंह को तत्काल मामले की जांच का आदेश दिया।
लेन-देन की तस्वीरें कैमरे में कैद, हड़कंप
वायरल वीडियो में यह साफ देखा जा सकता है कि पहले दो लोग आते हैं। दोनों लोग वहां कुर्सियों पर पहले से बैठे दो लोगों में से एक को पैसे सौंपते हैं। नकदी गिनने के बाद, पैसे लेने वाला व्यक्ति उसे अपने बगल में बैठे दूसरे व्यक्ति को दे देता है। इसके बाद, जिस व्यक्ति ने पैसे लिए थे, वह पैसे देने वाले व्यक्ति को कुछ निर्देश देता हुआ दिखाई देता है।
बताया जा रहा है कि दारोगा अभिनंदन कुमार किसी मामले को रफा-दफा करने या मदद करने के बदले नूनफारा निवासी एक कथित दलाल के माध्यम से रुपयों का लेन-देन कर रहे हैं। दलाल जब दारोगा जी को नोट थमाता है, तो वे बड़ी सहजता से उसे स्वीकार करते दिख रहे हैं। उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि पास में मौजूद व्यक्ति ने अपने मोबाइल फोन के कैमरे में उनकी इस पूरी करतूत को चुपके से कैद कर लिया है। हालांकि वीडियो की आधिकारिक तौर पर अभी तक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन वायरल होने के बाद से इस मामले ने काफी तूल पकड़ लिया है।
SSP ने लिया संज्ञान, जांच का आदेश
एसएसपी ने साफ कहा है कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के लिए बिल्कुल भी कोई जगह नहीं है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद, यदि आरोपी अधिकारी दोषी पाया जाता है, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग अपनी साख पर ऐसे दाग बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि तिरहुत रेंज के DIG चंदन कुशवाहा लगातार भ्रष्ट पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई कर रहे हैं। हाल ही में, उन्होंने एक दारोगा सदरे आलम को पांच साल पहले घूस लेने के मामले में नौकरी से बर्खास्त करके एक कड़ा संदेश दिया था।