पटना/मुजफ्फरपुर : बिहार की राजनीति में ‘खरमास’ के बाद बड़े उलटफेर और नई सरकार के गठन की चर्चाएं जोरों पर हैं। मुख्यमंत्री पद के लिए डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी समेत बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं के नाम रेस में बताए जा रहे हैं। लेकिन इस बीच, पूर्व सांसद आनंद मोहन ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने इन तमाम कयासों पर पानी फेरते हुए बीजेपी की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनके कहने का सीधा मतलब था कि 2025 से 2030 फिर से नीतीश का नारा था तो भाजपा वाले बीच में ही क्यों सीएम पद के लिए पर्ची निकलना चाह रहे हैं।
दरअसल, गुरुवार को मुजफ्फरपुर पहुंचे आनंद मोहन ने मीडिया के सवाल पर चुटकी लेते हुए कहा, “हमारे-आपके चाहने से कुछ नहीं होता। सब जानते हैं कि बीजेपी में मुख्यमंत्री की घोषणा नहीं होती, वहां तो सीधे पर्ची निकलती है। अब किसके भाग्य की पर्ची निकलेगी, इसके लिए थोड़ा इंतजार कीजिए। उन्होंने जेडीयू और बीजेपी के बीच चल रही खींचतान पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनाव में नारा “2025 से 2030 तक फिर से नीतीश” का था। तो फिर आखिर ऐसी कौन सी आफत आ गई कि बीच रास्ते में ही नेतृत्व बदलने की बात होने लगी?
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर यह फैसला किसी दबाव में लिया जा रहा है, तो इससे जेडीयू से ज्यादा भविष्य में बीजेपी को नुकसान होगा। पिछड़ा, अतिपिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वोट बैंक नीतीश कुमार के चेहरे की वजह से बीजेपी को मिलता रहा है। नीतीश को किनारे करने का मतलब है इस बड़े वोट बैंक को खो देना।
बता दें कि आनंद मोहन मुजफ्फरपुर के अहियापुर में हुए चर्चित प्रॉपर्टी डीलर हत्याकांड के सिलसिले में एसएसपी से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपराधियों की अविलंब गिरफ्तारी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इसी दौरान उन्होंने बिहार की मौजूदा राजनीतिक अस्थिरता पर अपनी बेबाक राय रखी। बिहार की राजनीति में मचे घमासान और सत्ता परिवर्तन की आहट के बीच पूर्व सांसद आनंद मोहन ने यह बयान देकर सियासी हलचल तेज कर दी है।