नवादा : जिले में अधिकारियों की मिलीभगत से मनरेगा में लूट का धंधा थमने कि नाम नहीं ले रहा है। केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले के रोह प्रखंड भीखमपुर गांव से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वर्क पेपर में बड़ा खेल उजागर
मामला एक मजदूर के वर्क पेपर से जुड़ा है, जहां नाम रंजन राज दर्ज है, लेकिन फोटो नगालैंड के राज्यपाल नंदकिशोर यादव की लगी पाई गई। इस गड़बड़ी ने मनरेगा में चल रहे फर्जीवाड़े को उजागर कर दिया है।
हाजिरी भी दर्ज, 12 मार्च तक दिखाया काम
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस नाम के मजदूर की 12 मार्च तक योजना के तहत कार्य में उपस्थिति दर्ज दिखाई गई है। यानी कागजों में नियमित काम और भुगतान की प्रक्रिया दर्ज है।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा मामला
मामला तब और गंभीर हो गया जब संबंधित दस्तावेज, डेटा और वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से फैलने लगा। वायरल सामग्री में स्पष्ट दिख रहा है कि मजदूर की जगह एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की तस्वीर लगी है।
पहले भी आ चुकी हैं ऐसी शिकायतें
स्थानीय लोगों का कहना है कि मनरेगा में फर्जी जॉब कार्ड, फर्जी हाजिरी और भुगतान की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। हालांकि इस बार मामला हाई प्रोफाइल होने के कारण ज्यादा चर्चा में है।
प्रशासन में मची हलचल, जांच शुरू
अब जब संवैधानिक पद पर बैठे विशिष्ट व्यक्ति कामामला सामने आया तब जिला प्रशासन के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। अंदरखाने जांच की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही जा रही है और दोषियों की पहचान की कोशिश की जा रही है।
काम बंद, डेटा डिलीट करने का दावा
रोह प्रखंड के मनरेगा प्रोग्राम पदाधिकारी ने बताया कि संबंधित योजना का काम फिलहाल बंद कर दिया गया है। साथ ही पूरा डेटा डिलीट कर दिया गया है और आर्थिक दंड भी लगाया गया है। कार्रवाई पर सवाल, जिम्मेदार कौन? हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि आर्थिक दंड किन लोगों पर लगाया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह कि इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार कौन है ? और उस पर क्या कार्रवाई होगी?
सिस्टम की पारदर्शिता पर उठ रहा सवाल
यह घटना न केवल योजना की पारदर्शिता पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि जमीनी स्तर पर योजनाओं का किस तरह दुरुपयोग हो रहा है। अब सभी की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है। बता दें इसके पूर्व अकबरपुर प्रखंड क्षेत्र सकरपुरा पंचायत मारोपुर आंगनबाड़ी सेविका द्वारा मनरेगा में काम व भुगतान का मामला आया था। सेविका ने स्वीकार किया कि उसने मनरेगा में मजदूरी कर राशि का भुगतान प्राप्त किया है।
बावजूद अबतक किसी के विरुद्ध कार्रवाई न कर प्रशासन ने मनरेगा में लूट की खुली छूट दे दी है। ऐसे में जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान तो बार बार लगता आ रहा है और लगता रहेगा। अब जब संवैधानिक पद पर कार्यरत व्यक्ति के नाम पर जालसाजी का मामला सामने आया है तब जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार हर किसी को रहेगा।
भईया जी की रिपोर्ट