मुजफ्फरपुर में बीती रात पूर्व मंत्री और भाजपा नेता रामसूरत राय के करीबी हरिशंकर सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। अपराधियों ने हरिशंकर सिंह को उनके बेटे के सामने ही तीन गोलियां मारी और मौके से फरार हो गए। वारदात को गरहां थाना क्षेत्र के मुरादपुर भरत गांव में रात 10 बजे के आसपास अंजाम दिया गया। बताया जाता है कि हरिशंकर सिंह किसानी के अलावा प्रॉपर्टी डीलर का भी काम करते थे। उनपर पूर्व में भी जानलेवा हमला हुआ था, लेकिन तब वे बच गए थे। हरिशंकर सिंह पर ताजा हमला तब हुआ जब वे अपने बेटे और एक मजदूर के साथ खेत से घर लौट रहे थे। अपराधियों ने उनके सिर, सीने और पेट में तीन गोलियां दाग दी जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार हरिशंकर सिंह देर रात सनाठी चौर स्थित अपने खेत से गेहूं की दौनी कराकर बाइक से घर लौट रहे थे। बाइक के पीछे उनका मजदूर कैलाश मांझी बैठा था, जबकि उनका बेटा भी साथ था। जैसे ही वे बुझावन भगत उत्क्रमित मध्य विद्यालय के समीप पहुंचे वहां पहले से घात लगाए बाइक सवार तीन अपराधियों ने उन्हें घेर लिया और गोलियां दागने लगे। फायरिंग देख बेटा जान बचाकर पास के खेतों की ओर भागा। अपराधियों ने हरिशंकर के सिर में एक और सीने व पेट में दो गोलियां मारीं। घर से महज 100 मीटर की दूरी पर हुई इस वारदात के बाद अपराधी हथियार लहराते हुए भाग निकले। प्रारंभिक छानबीन में पुलिस इस हत्याकांड के पीछे जमीन विवाद और पुरानी रंजिश को मुख्य कारण मान रही है। मृतक की मां, मीना देवी ने बताया कि जमीन के मालिकाना हक को लेकर उनके रिश्तेदारों के साथ एक पुराना विवाद चल रहा था।
इधर इस वारदात की सूचना मिलते ही पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता रामसूरत राय SKMCH अस्पताल पहुंचे। अपने पंचायत के युवा और बेहद करीबी हरिशंकर की लाश देख रामसूरत राय खुद को संभाल नहीं पाए और मीडिया वालों के सामने ही फूट-फूट कर रो पड़े। उन्होंने रुंधे गले से कहा—’यह मेरे घर के बगल का, मेरे परिवार का ही लड़का था। अपराधियों ने उसे बड़ी बेरहमी से मारा है। यह पुलिस की शिथिलता का नतीजा है’। बताया जाता है कि आठ माह पहले भी हरिशंकर सिंह पर जानलेवा हमला हुआ था। लेकिन तब चे बाल—बाल बच गए थे। मृतक के परिजनों का आरोप है कि हरिशंकर की जान पुलिस की लापरवाही के कारण गई। हरिशंकर के घर पर इससे पहले 27 जून, 2025 को भी हमला हुआ था। उस समय, उसने पुलिस को एक लावारिस मोटरसाइकिल सौंपी थी और अपनी जान को खतरा बताते हुए एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। परिवार का कहना है कि अगर पुलिस ने उस समय ही अपराधियों को सलाखों के पीछे डाल दिया होता, तो हरिशंकर आज भी जिंदा होता।