– आधी रात मची अफरा-तफरी: दवा स्टोर में लगी भीषण आग, बाल-बाल बचे सर्जिकल वार्ड के मरीज।
नवादा सदर अस्पताल परिसर शुक्रवार की रात उस वक्त रणक्षेत्र में तब्दील हो गया, जब अस्पताल के मुख्य दवा स्टोर में भीषण आग लग गई। सिविल सर्जन कार्यालय के ठीक पीछे स्थित इस स्टोर रूम से उठी आग की लपटों ने न केवल लाखों रुपये की जीवन रक्षक दवाइयों और उपकरणों को राख कर दिया, बल्कि अस्पताल की ‘फायर सेफ्टी’ दावों की भी पोल खोलकर रख दी। गनीमत रही कि समय रहते बगल के सर्जिकल वार्ड से मरीजों को सुरक्षित निकाल लिया गया, वरना यह हादसा एक बड़ी मानवीय त्रासदी में बदल सकता था। अब सवाल यह है कि जिला अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम आखिर कागजों तक ही क्यों सीमित थे?
सदर अस्पताल परिसर, सिविल सर्जन कार्यालय के पीछे स्थित दवा स्टोर रूम। शुक्रवार रात करीब 9:00 बजे, जब अस्पताल में मरीजों और तीमारदारों की चहल-पहल थी। अचानक उठी लपटों ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। स्टोर में रखी लाखों रुपये मूल्य की जीवन रक्षक दवाइयां जलकर पूरी तरह नष्ट हो गईं। सरकारी फंड से खरीदे गए कई महंगे चिकित्सा उपकरण आग की भेंट चढ़ गए। अस्पताल प्रशासन को इस अग्निकांड से भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
आग की भयावहता देख स्टोर के बगल वाले सर्जिकल वार्ड में भर्ती मरीजों को आनन-फानन में शिफ्ट किया गया। सूचना मिलने पर दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुँची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, जिससे आग अन्य वार्डों तक नहीं फैल सकी। क्या अस्पताल में अग्निशमन यंत्र कार्यशील थे? क्या नियमित रूप से फायर ऑडिट किया गया था? शुरुआती जांच में कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, लेकिन पुराने तारों और लोड मैनेजमेंट पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया?लाखों की सरकारी संपत्ति के स्वाहा होने का जिम्मेदार कौन है?
भईया जी की रिपोर्ट