Nawada : “हौसलों के तरकश में कोशिश का वो तीर जिंदा रख, हार जाए चाहे जिंदगी में सब कुछ, मगर फिर से जीतने की उम्मीद जिंदा रख।” नवादा की धरती से एक और गौरवशाली खबर! रविराज के बाद अब रितिका पाण्डेय ने अपनी सफलता से यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे फौलादी हों, तो संसाधनों की कमी कभी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकती।
नवादा जिले के हिसुआ की बेटी रितिका पाण्डेय ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा-2025 में 185वीं रैंक हासिल कर इस कहावत को चरितार्थ कर दिया है। मात्र 24 साल की उम्र में मिली यह कामयाबी इसलिए भी खास है क्योंकि रितिका ने परिवार की आर्थिक तंगी को अपनी ढाल बनाया और पिता के संघर्षों को अपनी प्रेरणा। एक साधारण व्यवसायी की बेटी ने अपनी मेधा और स्वाध्याय (Self-study) के दम पर आज पूरे बिहार को गौरवान्वित किया है।
रितिका ने अपने तीसरे प्रयास में यह मुकाम हासिल किया। पहले प्रयास में प्रीलिम्स और दूसरे में इंटरव्यू तक पहुँचने के बाद, अंततः तीसरे प्रयास में सफलता का परचम लहराया। रितिका के पिता संजय पाण्डेय दुकानों में कैरी बैग सप्लाई करने का साधारण व्यवसाय करते हैं, लेकिन उन्होंने तंगी के बावजूद बच्चों की शिक्षा को सर्वोपरि रखा। रितिका शुरू से ही होनहार रही हैं। 12वीं में पूरे झारखंड राज्य में दूसरा स्थान प्राप्त किया। दिल्ली के गार्गी कॉलेज से ग्रेजुएशन (Physics Hons) में 9.7 CGPA के साथ कॉलेज में दूसरा स्थान पाया।
रितिका की सबसे बड़ी ताकत उनका स्वाध्याय (Self-study) रहा। दिल्ली और झारखंड में शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने खुद की मेहनत पर भरोसा किया। माँ बबीता पाण्डेय (गृहिणी) और भाई-बहनों के सहयोग ने रितिका के आत्मविश्वास को बनाए रखा। 24 साल की उम्र में मिली यह सफलता दर्शाती है कि असफलता (पिछले दो प्रयास) से डरने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना ही जीत की कुंजी है।
भईया जी की रिपोर्ट