बिहार की 5 सीटों समेत देशभर के 10 राज्यों से राज्यसभा की 37 सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव होने हैं। लेकिन इस चुनाव को लेकर बिहार में सियासी हलचल अभी से तेज हो गई है। सभी की निगाहें बिहार में NDA और महागठबंधन के विधायकों की संख्या और सियासी गुणा—भाग पर टिकी हुई हैं। राज्यसभा के लिए बिहार की ये पांच सीटें इसलिए खास हैं क्योंकि इनमें से चार सीटों का गणित तो एकदम क्लियर है। लेकिन राज्य की पांचवीं राज्यसभा सीट के लिए कड़े मुकाबले की तस्वीर बनती दिख रही है। सत्ताधारी NDA और विपक्षी महागठबंधन दोनों की नजरें बिहार से राज्यसभा की इस 5वीं सीट पर है। चर्चा है कि राजद इस सीट पर अपना उम्मीदवार उतार सकती है। ऐसे में ओवैसी की पार्टी AIMIM के 5 और BSP के 1 विधायक की भूमिका काफी अहम हो गई है। कहा जाए कि ये दोनों छोटे दल इस चुनाव में किंगमेकर वाली भूमिका में आ गए हैं क्योंकि 5वीं सीट पर कब्जे के लिए दोनों ही गठबंधनों को इनके सपोर्ट की जरूरत पड़ने वाली है।
राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया का शेड्यूल
चुनाव आयोग के अनुसार 37 सीटों पर राज्यसभा चुनाव के लिए नॉमिनेशन 26 फरवरी से शुरू होगी और यह 5 मार्च तक चलेगी। जबकि उम्मीदवार 9 मार्च तक नाम वापस ले सकते हैं। अगर उम्मीदवारों की संख्या खाली हो रही सीटों से ज्यादा रहती है तो 16 मार्च को वोटिंग होगी। नहीं तो चुनाव में निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति भी बन सकती है।
NDA का रास की 5 सीटों पर गणित
243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन चाहिए। अभी NDA के पास विधानसभा में कुल 202 विधायक हैं। इसमें भारतीय जनता पार्टी के 89 MLA, जनता दल यूनाइटेड के 85 MLA, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 19 MLA, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के 5 MLA और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा के 4 MLA शामिल हैं। इसके आधार पर, 164 विधायकों के समर्थन से NDA आसानी से चार सीटें जीत सकता है। यहां उल्लेखनीय है कि राज्यसभा की चार सीटें जीतने के बाद भी NDA के पास उसके विधायकों के 38 वोट बचे रहते हैं। लेकिन अगर मुकाबला होता है तो पांचवीं सीट जीतने के लिए उसे कम से कम तीन और MLA के सपोर्ट की जरूरत होगी।
रास चुनाव में महागठबंधन का नंबर गेम
उधर आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए विपक्षी खेमे में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की अगुवाई वाला महागठबंधन है। महागठबंधन के पास अभी बिहार विधानसभा में कुल 35 विधायक हैं, जिसमें RJD के 25, कांग्रेस के छह और लेफ्ट पार्टियों के MLA शामिल हैं। अगर इसमें असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के पांच MLA और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के एक MLA को जोड़ दिया जाए, तो महागठबंधन के समर्थक विधायकों की कुल संख्या विधानसभा में 41 तक पहुंच सकती है। यह 41 की संख्या बिहार से राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए जरूरी संख्या है। इसका मतलब है कि ओवैसी और BSP बिहार से राज्यसभा की पांचवीं सीट पर किंगमेकर बन सकते हैं। कहा जा रहा कि राज्यसभा चुनाव के लिए विपक्ष की रणनीति इस बात पर निर्भर करेगी कि NDA पांचवीं सीट के लिए उम्मीदवार उतारता है या नहीं।
AIMIM और BSP की अहम भूमिका
इसबीच राज्यसभा चुनाव में बिहार की 5 सीटों के बारे में रणनीति पर AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने साफ कहा कि महागठबंधन के किसी भी उम्मीदवार को समर्थन देना जल्दबाजी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर विपक्ष कोई संयुक्त उम्मीदवार उतारता है तो AIMIM उम्मीदवार पर विचार किया जाना चाहिए। इसका मतलब है कि AIMIM बिना शर्त समर्थन देने को तैयार नहीं दिख रहा है। बल्कि AIMIM खुद अपने लिए यह सीट महागठबंधन से घुमा—फिराकर मांग रहा है।
इस बीच, BSP के प्रदेश अध्यक्ष शंकर महतो ने भी साफ कह दिया है कि इस मामले पर पार्टी सुप्रीमो कुमारी मायावती के निर्देशों के आधार पर फैसला लिया जाएगा। महतो ने कहा कि हमारी BSP चीफ जो भी फैसला लेंगी, हम उसे मानेंगे। ऐसे में यह स्पष्ट हो जाता है कि बिहार से राज्यसभा की इस पांचवीं सीट के लिए लड़ाई इन दोनों की छोटी पार्टियों के रुख पर टिक गई है।
क्या बन रही सियासी उठापटक की तस्वीर?
अगर पिछले वर्षो में बिहार की राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव को देखा जाए तो यह ट्रेंड देखा गया है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष आपसी सहमति से सीटों का बंटवारा कर लेते थे। लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है। साथ ही एनडीए के भीतर भी सीट बंटवारे को लेकर खींचतान के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, BJP और JDU दो-दो सीटों पर दावा कर सकते हैं। जबकि LJP (RV), HAM (S), और RLM भी कम से कम एक-एक सीट की मांग कर रहे हैं। RLM चीफ उपेंद्र कुशवाहा भी इसबार खाली हो रही एक सीट से एनडीए के राज्यसभा सदस्य हैं। वे राज्यसभा में अपना एक और टर्म चाह रहे हैं। वहीं हम संस्थापक जीतन राम मांझी भी बार-बार अपनी पार्टी के लिए एक सीट की मांग उठाते रहे हैं। वहीं जदयू के हरिवंश और रामनाथ ठाकुर अपना लगातार दूसरा टर्म पूरा कर रहे हैं। उनके इस बार भी तिबारा नॉमिनेशन की बात चल रही है। यह भी अटकलें हैं कि BJP कुछ नए चेहरों को राज्यसभा भेज सकती है। पार्टी के भीतर संगठनात्मक संतुलन और जातीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए नाम तय किए जाएंगे। ऐसी भी चर्चा है कि BJP के नेशनल प्रेसिडेंट नितिन नवीन और भोजपुरी एक्टर पवन सिंह BJP की लिस्ट में हो सकते हैं। बहरहाल ये अभी चर्चा है और आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।