नवादा : केंद्र और राज्य सरकारें पर्यावरण संरक्षण को लेकर लगातार बड़े स्तर पर काम कर रही हैं। इसी कड़ी में राज्यभर में पौधारोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस प्रयास के तहत वन विभाग अनुदान देकर आम लोगों को भी पौधा लगाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
ऐसे में सबसे खास बात यह है कि अब यह पहल सिर्फ हरियाली तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत जरिया भी बनती जा रही है। जिले से ऐसी ही एक प्रेरक कहानी सामने आई है। पौधशाला (नर्सरी) महिलाओं और उनके परिवारों के लिए आमदनी का साधन बन गई है तो आइए समझते हैं पूरी कहानी
महिला ने नर्सरी खोलकर बेटे को बनाया हुनरमंद
जिले के नारदीगंज प्रखंड की हड़िया पंचायत अंतर्गत गांव जहानपुर में जीविका से जुड़ी महिला अजमतीया देवी ने नर्सरी खोलकर अपनी जिंदगी की दिशा बदल दी है। जीविका योजना के तहत मिले मार्गदर्शन और सहयोग से अजमतीया देवी बेटे के साथ मिलकर पौधे तैयार करने का काम कर रही हैं। तैयार किए गए पौधों को बाद में वन विभाग और मनरेगा योजना के तहत सरकार द्वारा सीधे खरीदा जाता है।
जानकारी के अनुसार, एक नर्सरी खोलने और साल भर में 20 हजार पौध तैयार करने में करीब 50 हजार रुपये की लागत आती है। इस नर्सरी में 5 प्रकार के पौधे तैयार किए जाते हैं, जिनकी सरकारी योजनाओं में काफी मांग रहती है। विभागीय दर के अनुसार सरकार 25 से 30 रुपये प्रति पौधा के हिसाब से खरीद करती है। बड़ी संख्या में पौधे तैयार होने के कारण यह काम लाभकारी साबित हो रहा है।
2 से चार लाख का हो रहा मुनाफा
अजमतीया देवी के बेटे संजीत कुमार बताते हैं कि उनकी मां को जीविका योजना से इस योजना का लाभ मिला। शुरुआत में थोड़ी मेहनत जरूर लगी, लेकिन अब नर्सरी से सालाना 2 से 4 लाख रुपये तक का मुनाफा हो जाता है। संजीत कुमार खुद से अपने पौधशाला में पौधा तैयार कर ब्लॉक स्तर पर सरकार को वन विभाग को बेचने का काम कर रहे हैं, जिससे परिवार की आमदनी में लगातार इजाफा हो रहा है।
भईया जी की रिपोर्ट