राज्य सभा सांसद आदित्य साहू को झारखंड बीजेपी का नया अध्यक्ष बनाया गया है। वे फिलहाल तक बतौर प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष वहां काम कर रहे थे। झारखंड प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए उन्होंने कल ही नामांकन किया था और आज बुधवार को उनके प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने की घोषणा कर दी गई। आदित्य साहू की नियुक्ति को झारखंड में ओबीसी को बीजेपी से जोड़ने की पार्टी की ताजा रणनीतिक पहल माना जा रहा है। इस नियुक्ति के जरिए बीजेपी ने कई बड़े राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया है। इसके तहत यह स्पष्ट हो गया कि अब बीजेपी उत्तर प्रदेश और बिहार की ही तरह झारखंड में भी ओबीसी राजनीति को लेकर ही आगे बढ़ेगी। यूपी में पंकज चौधरी और बिहार में संजय सरावगी के बाद अब झारखंड में भी बीजेपी ने ओबीसी चेहरे पर दांव लगा दिया है।
झारखंड में जातीय संतुलन की कवायद
मालूम हो कि झारखंड में ओबीसी आबादी पचास प्रतिशत से भी अधिक है। बीजेपी के कई मौजूदा विधायक भी ओबीसी समुदाय से ही आते हैं। ऐसे में अगले विधानसभा चुनाव की रणनीति पर भाजपा अभी से ही काम करना शुरू कर चुकी है। आदित्य साहू को झारखंड की कमान सौंपने के साथ बीजेपी ने राज्य की राजनीति में जातीय संतुलन बैठाने का प्रयास भी किया है। जहां पूर्व मुख्यमंत्री और प्रमुख आदिवासी चेहरा बाबूलाल मरांडी विधानसभा में नेता विपक्ष हैं वहीं आदित्य साहू के रूप में बीजेपी ने संगठन को ओबीसी चेहरा दिया है। इससे पहले भी बीजेपी ने यही प्रयोग किया था जब ओबीसी नेता रघुबर दास और आदिवासी नेता अर्जुन मुंडा और बाबूलाल मरांडी को मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपी थी। झारखंड में आदिवासियों की संख्या करीब 25 प्रतिशत है। ऐसे में बीजेपी ने आदिवासी और ओबीसी नेतृत्व को आगे किया है।
जमीन से जुड़े कार्यकर्ता को टॉप पोस्ट
संगठन की दृष्टि से भी देखें तो आदित्य साहू को झारखंड में भाजपा की कमान मिलना एक बड़ा संदेश है। एक ऐसा राज्य जहां पार्टियों में दल-बदल आम बात है, बीजेपी ने एक ऐसे चेहरे को कमान सौंपी जो बीजेपी मूल का है। जमीन से जुड़ा हुआ है और एक सामान्य कार्यकर्ता से यहां तक पहुंचा है। आदित्य साहू के प्रोफाइल पर नजर डालें तो उन्होंने पार्टी के बूथ स्तर के कार्यकर्ता स्तर से अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया था। वे संगठन के विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग दायित्व संभाल चुके हैं जिनमें महासचिव से लेकर उपाध्यक्ष तक की जिम्मेदारी शामिल है। उन्हें झारखंड के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने का अनुभव भी है। वे पलामू और कोल्हान क्षेत्रों में काम कर चुके हैं। लिहाजा उनका पूरे राज्य के कार्यकर्ताओं के साथ जीवंत और आत्मीय संबंध है।