नवादा : जिले के महत्वपूर्ण व्यावसायिक और आवागमन केंद्र हिसुआ के लिए 2026 ऐतिहासिक सिद्ध होने वाला है। बहुप्रतीक्षित हिसुआ बाईपास के निर्माण को आधिकारिक स्वीकृति मिल जाने के बाद नए साल में इसके मूर्तरूप लेने की संभावना है। कार्य की पूर्णता के बाद से न केवल हिसुआ शहर, बल्कि पूरे जिले के लोगों में हर्ष का माहौल है। बाईपास का निर्माण क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होने वाला है। प्रमुख सड़क परियोजना पर सारी प्रक्रिया शुरू हो जाने की उम्मीदों के बीच वह दिन दूर नहीं जब हिसुआ की सड़कों पर रेंगते वाहनों की जगह सुगम यातायात का नजारा होगा।
परियोजना निश्चित रूप से जिले के ढांचागत विकास में एक नया अध्याय जोड़ेगी। परियोजना का स्वरूप तय, कम लागत में अधिक सुविधा हिसुआ बाईपास को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि राज्य सरकार को जमीन अधिग्रहण की जटिलताओं और खर्च का कम सामना करना पड़े। यह बाईपास बोधगया-राजगीर फोरलेन सड़क पर स्थित बगोदर गांव से शुरू होकर गुफा मोड़ तक जाएगा।
पथ प्रमंडल नवादा अंतर्गत नवीन हिसुआ बाईपास एनएच 82 पर बगोदर से एसएच 08 के उड़सा आहर भाया बगोदर-करमचक पथ के चैनेज शून्य किमी से 2.90 किमी तक निर्माण कार्य किया जाएगा। यानी यह सड़क बगोदर आहर से होते हुए उड़सा आहर के रास्ते गुफा मोड़ तक पहुंचेगी। परियोजना पर 35 करोड़ 19 लाख 35 हजार 500 रुपए खर्च होने का अनुमान है।
पर्यटन और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा
हिसुआ न केवल व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह राजगीर, बोधगया और पावापुरी जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थलों के रूट पर भी पड़ता है। बाईपास बनने से गया और राजगीर जाने वाले श्रद्धालुओं को शहर के जाम में नहीं फंसना पड़ेगा। खासकर सावन के महीने में इस सड़क से होकर पूरे महीने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से लाखों कांवरिया देवघर स्थित बाबा भोलेनाथ पर जलाभिषेक करने जाते हैं, जिन्हें काफी लाभ मिलेगा।
शहर के अंदर ट्रैफिक कम होने से स्थानीय दुकानदार और ग्राहक राहत महसूस करेंगे। भारी वाहनों के सीधे निकल जाने से ईंधन की खपत कम होगी और समय की बचत होगी। कुल मिला कर, यह बाईपास केवल एक सड़क नहीं, बल्कि हिसुआ की नई जीवनरेखा साबित होगी। इसके बनने से शहर की सड़कों पर दबाव कम होगा और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। उल्लेखनीय है कि इस स्थान के आसपास ही आने वाले दिनों में मगध विश्वविद्यालय के शाखा कार्यालय खोले जाने की कवायद जारी है। जिसका हाल ही में हिसुआ आगमन के क्रम में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान द्वारा आश्वासन दिया गया है। इसके बाद से हिसुआ की अलग पहचान कायम हो जाएगी।
सांसद और प्रशासन के प्रयासों को मिली सफलता
बाईपास के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन ने लंबे समय तक प्रयास किए हैं। नवादा के सांसद विवेक ठाकुर इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए निरंतर सक्रिय थे। कुछ महीने पूर्व ही स्थानीय अधिकारियों ने प्रस्तावित रूट का भौतिक निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। हिसुआ बाईपास को मंजूरी मिलना, इन सामूहिक प्रयासों की जीत मानी जा रही है।
काफी कम भूमि का होगा अधिग्रहण, कार्य की गति रहेगी तेज
बाईपास निर्माण में सबसे खास बात यह है कि इसके निर्माण के लिए सरकार को रैयतों की बहुत कम जमीन का अधिग्रहण करना पड़ेगा, क्योंकि बाईपास के चिह्नित मार्ग पर ज्यादातर भूमि बिहार सरकार की है। इससे अधिग्रहण को लेकर कोई पेंच फंसने की संभावना काफी कम रहेगी, जो राहत भरा साबित होगा और कार्य की गति तेज बने रहने की पूरी संभावना है।
भईया जी की रिपोर्ट